Homeसनातन धर्म149वीं जगन्नाथ रथयात्रा: 'जगत मामा' की ऐतिहासिक मामेरा परंपरा का होगा पुनर्स्थापन,

149वीं जगन्नाथ रथयात्रा: ‘जगत मामा’ की ऐतिहासिक मामेरा परंपरा का होगा पुनर्स्थापन,

भगा भगत पोल स्थित रणछोड़ मंदिर में लौटेगी 1878 की मूल परंपरा, जबकि रथयात्रा मार्ग पर वर्षों से चली आ रही वर्तमान परंपरा भी रहेगी यथावत।

अश्विन अग्रवाल।
गुजरात प्रवासी न्यूज़
अहमदाबाद।
भगवान जगन्नाथ की 149वीं ऐतिहासिक रथयात्रा इस वर्ष एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के पुनर्स्थापन की साक्षी बनेगी। सरसपुर की भगा भगत पोल, मोटी वासण शेरी स्थित रणछोड़ मंदिर में वर्षों बाद रथयात्रा के पारंपरिक निशान के साथ ‘मामेरा (भात)’ की ऐतिहासिक रस्म पुनः आयोजित की जाएगी।
इतिहासकारों और स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, वर्ष 1878 में अहमदाबाद रथयात्रा प्रारंभ होने के समय से भगवान जगन्नाथ के सरसपुर आगमन पर पारंपरिक निशान सबसे पहले भगा भगत पोल स्थित रणछोड़ मंदिर पहुंचता था। यहीं पूजा-अर्चना, आरती तथा भगवान को मामेरा अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती थी।
समय के साथ रथयात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से भगा भगत पोल में स्थान कम पड़ने लगा। इसके चलते पिछले लगभग दो दशकों से भगवान जगन्नाथ का रथ जिस रणछोड़ मंदिर चौराहे पर ठहरता है, वहां मामेरा कार्यक्रम आयोजित होने लगा। इस वर्ष भी जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा वहां का पारंपरिक मामेरा पूर्ववत आयोजित किया जाएगा और उसमें किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
इसी के साथ सरसपुर के स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने जनसहयोग से वर्ष 1878 से जुड़ी मूल परंपरा को उसके ऐतिहासिक स्थल भगा भगत पोल स्थित रणछोड़ मंदिर में पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। आमजन के आर्थिक सहयोग से यहां भी पारंपरिक मामेरा आयोजित किया जाएगा।
इस वर्ष की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि भगवान जगन्नाथ को दो स्थानों पर भात (मामेरा) अर्पित किया जाएगा। पहला, जगत मामा की मूल एवं ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार भगा भगत पोल स्थित रणछोड़ मंदिर में तथा दूसरा, रथयात्रा के दौरान जहां भगवान का रथ परंपरागत रूप से ठहरता है, उस रणछोड़ मंदिर चौराहे पर। दोनों आयोजन अपनी-अपनी परंपरा के अनुसार संपन्न होंगे। इसका उद्देश्य किसी परंपरा को बदलना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करते हुए दोनों धार्मिक परंपराओं का सम्मान बनाए रखना है।
वर्ष 2019 में तत्कालीन महंत लक्ष्मणदासजी, जगन्नाथ मंदिर के गादीपति दिलीपदासजी महाराज तथा ट्रस्टी महेंद्रभाई ने भी इस ऐतिहासिक परंपरा को पुनः प्रारंभ करने पर सकारात्मक सहमति व्यक्त की थी। अब स्थानीय नागरिकों की पहल से यह संकल्प मूर्त रूप लेता दिखाई दे रहा है।
क्या कहते हैं स्थानीय नागरिक
     भगा भगत पोल के वरिष्ठ नागरिक कमलेश राणा ने विशेष बातचीत में कहा कि यह किसी व्यक्ति या संस्था का नहीं, बल्कि भगवान और पूरे गांव की आस्था का विषय है। सरसपुर की धार्मिक विरासत और जनआस्था से जुड़ी इस परंपरा का जिस स्थान से प्रारंभ हुआ था, वहीं पुनः आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगा।
         बाला हनुमान मंदिर, सरसपुर चरण पादुका महोत्सव समिति के आयोजक हेमेन्द्र बागड़ी ने बताया कि लगातार दूसरे वर्ष चरणपादुका पूजन भी पारंपरिक रूप से सरसपुर में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ अपने मामा के घर आते हैं और उन्हें चरण पादुका पहनाकर श्रद्धालु स्वयं को कृतार्थ मानते हैं। गांव की जनता द्वारा स्वैच्छिक रूप से भगा भगत पोल में भात अर्पित करने की परंपरा का पुनर्जीवन पूरे सरसपुर के लिए गौरव का विषय है। साथ ही रणछोड़ मंदिर चौराहे पर भी पूर्ववत भात का आयोजन होगा।
 मोटी वासण शेरी के निवासी नरेशभाई गांठीयावाला ने कहा कि भगवान को मामेरा अर्पित करना केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और परंपरा का प्रतीक है। भगा भगत पोल में पूरा गांव एक साथ अपने भानजे भगवान जगन्नाथ को भात अर्पित करेगा।
उल्लेखनीय है कि इस विषय पर जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी महेंद्रभाई से संपर्क एवं मंदिर में रूबरू मुलाकात का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
इस प्रकार 149वीं जगन्नाथ रथयात्रा में एक ओर जगत मामा की ऐतिहासिक परंपरा का पुनर्स्थापन होगा, तो दूसरी ओर रथयात्रा मार्ग पर वर्षों से चली आ रही वर्तमान परंपरा भी यथावत जारी रहेगी। धार्मिक विरासत को सहेजने की यह पहल इस वर्ष की रथयात्रा को ऐतिहासिक और स्मरणीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गुजरात प्रवासी न्यूज़
अहमदाबाद।
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