रिपोर्ट: राहुल शर्मा, चैनल हेड
गुजरात प्रवासी न्यूज़, अहमदाबाद
नई दिल्ली, 12 जून। देशभर में उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और बाजार में बढ़ती अनियमितताओं के विरुद्ध संघर्षरत अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने गुरुवार को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया। संगठन के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों से आए 500 से अधिक कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने एमआरपी (मैक्सिमम रिटेल प्राइस) व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और उपभोक्ताओं को कथित रूप से हो रही आर्थिक लूट को रोकने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
धरना-प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की कि एमआरपी निर्धारण प्रक्रिया को वैज्ञानिक, पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनाया जाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वर्तमान व्यवस्था में उत्पादकों को वस्तुओं पर मनमाने ढंग से एमआरपी निर्धारित करने की खुली छूट मिली हुई है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
मनमानी एमआरपी से उपभोक्ताओं का हो रहा शोषण
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार ने पैकेज्ड वस्तुओं पर एमआरपी अंकित करना अनिवार्य तो किया है, लेकिन किसी उत्पाद पर अधिकतम कितना मूल्य मुद्रित किया जा सकता है, इसके लिए कोई स्पष्ट कानूनी सीमा या प्रभावी नियंत्रण तंत्र नहीं है। इसी कमी का लाभ उठाकर कई निर्माता कंपनियां वस्तुओं पर वास्तविक लागत से कई गुना अधिक एमआरपी छाप रही हैं।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि निर्माता और व्यापारियों की मिलीभगत के कारण उपभोक्ताओं को वस्तुओं के लिए आवश्यकता से अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। संगठन का कहना है कि वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
एक महीने से चल रहा है राष्ट्रव्यापी जन-जागरण अभियान
ग्राहक पंचायत ने बताया कि एमआरपी व्यवस्था में सुधार और उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए पिछले एक महीने से देशभर में व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। संगठन के कार्यकर्ता गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों को एमआरपी के नाम पर होने वाली कथित अनियमितताओं के बारे में जागरूक कर रहे हैं।
इसी अभियान के अंतर्गत जंतर-मंतर पर आयोजित धरना-प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप दिया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अपनी मांगों को बुलंद किया। प्रदर्शन के पश्चात संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें एमआरपी प्रणाली में सुधार हेतु आवश्यक कानूनी संशोधनों की मांग की गई।
उदाहरण देकर बताई एमआरपी व्यवस्था की विसंगतियां
धरने के दौरान संगठन के वक्ताओं ने एमआरपी व्यवस्था की खामियों को उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने दावा किया कि लगभग 2.10 रुपये लागत वाली इंजेक्शन की सुई बाजार में 30 रुपये या उससे अधिक की एमआरपी पर उपलब्ध होती है। कई बार उपभोक्ता के पास कोई विकल्प नहीं होता और उसे निर्धारित कीमत पर ही उत्पाद खरीदना पड़ता है।
संगठन का कहना है कि ऐसे अनेक उत्पाद बाजार में उपलब्ध हैं जिनकी उत्पादन लागत और विक्रय मूल्य के बीच अत्यधिक अंतर है। इस स्थिति में उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए प्रभावी नियामक व्यवस्था की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय नेतृत्व की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष नारायणभाई शाह ने अपने संबोधन में कहा कि उपभोक्ता देश की अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण घटक है और उसके हितों की रक्षा सरकार तथा समाज दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब तक एमआरपी निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण जारी रहेगा।
राष्ट्रीय सचिव जयंत कथीरिया ने कहा कि संगठन आने वाले समय में देशव्यापी आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप देगा। वहीं राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष प्रदीप बंसल, राष्ट्रीय सह सचिव एम. विवेकानंद तथा राष्ट्रीय सह पर्यावरण प्रमुख मुकेश त्यागी ने भी उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिए कठोर कानून बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
अनेक राज्यों से पहुंचे कार्यकर्ता
कार्यक्रम में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं कार्यक्रम संयोजक सुनील जैन, दिल्ली क्षेत्र संगठन मंत्री नवीन जैन, पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र संगठन मंत्री लाखन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष ईश्वर चंद, प्रदेश सचिव एवं सह संयोजक बालकृष्ण चौरसिया सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
मंच संचालन विकास जोशी ने किया। इसके अतिरिक्त ब्रज प्रांत के प्रांतीय उपाध्यक्ष नीरज काका, महिला सह आयाम प्रमुख नूतन गुप्ता, रोजगार सृजन सह आयाम प्रमुख शिवम वार्ष्णेय, जिला अध्यक्ष हरिगढ़, जिला कोषाध्यक्ष देवेश गौतम एडवोकेट सहित विभिन्न जिलों से आए लगभग 35 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
सरकार से की ठोस कार्रवाई की मांग
धरना-प्रदर्शन के समापन पर संगठन ने सरकार से मांग की कि एमआरपी निर्धारण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और नियंत्रण तंत्र विकसित किया जाए, उत्पादों की वास्तविक लागत और लाभांश के बीच संतुलन सुनिश्चित किया जाए तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सख्त कानून बनाए जाएं।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और अधिक व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
(राहुल शर्मा)
चैनल हेड
गुजरात प्रवासी न्यूज़, अहमदाबाद


इन कार्यक्रमों के दौरान रेलवे अधिकारियों ने वाहन चालकों को बताया कि बंद हो रहे फाटक के नीचे से निकलने, चेतावनी संकेतों की अनदेखी करने तथा जल्दबाजी में रेलवे ट्रैक पार करने जैसी लापरवाहियां गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं। लोगों को यह भी समझाया गया कि ट्रेन की गति का सही अनुमान लगाना कई बार कठिन होता है, इसलिए रेलवे फाटक बंद होने की स्थिति में धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
