પશ્ચિમ રેલવેએ ચાર જોડી સ્પેશિયલ ટ્રેનોના ફેરા વધાર્યા, મુસાફરોને મળશે મોટી રાહત
અમદાવાદ, 30 જુલાઈ: મુસાફરોની વધતી માંગ અને સુવિધાને ધ્યાનમાં રાખીને પશ્ચિમ રેલવેએ અમદાવાદ મંડળમાંથી દોડતી ચાર જોડી સ્પેશિયલ ટ્રેનોના ફેરા લંબાવવાનો મહત્વપૂર્ણ નિર્ણય કર્યો છે. આ નિર્ણયથી ગુજરાત, ઉત્તર પ્રદેશ અને બિહાર વચ્ચે મુસાફરી કરતા હજારો મુસાફરોને મોટી રાહત મળશે. ખાસ કરીને તહેવારોના સમયગાળા દરમિયાન વધતી ભીડને ધ્યાનમાં રાખીને લેવામાં આવેલો આ નિર્ણય મુસાફરો માટે ખૂબ જ લાભદાયી સાબિત થશે.
પશ્ચિમ રેલવે દ્વારા આપવામાં આવેલી માહિતી મુજબ ટ્રેનોના સમયપત્રક, રોકાણ (હાલ્ટ) અને કોચની રચનામાં કોઈ ફેરફાર કરવામાં આવ્યો નથી. માત્ર ટ્રેનોના સંચાલનની અવધિ લંબાવવામાં આવી છે. આ તમામ ટ્રેનો માટે આરક્ષણ (બુકિંગ) તમામ પીઆરએસ કાઉન્ટરો તેમજ આઈઆરસીટીસીની વેબસાઇટ પર શરૂ કરવામાં આવ્યું છે.
1. અસારવા–કાનપુર સેન્ટ્રલ સાપ્તાહિક સ્પેશિયલ (ટ્રેન નં. 01906/01905)
ટ્રેન નં. 01906 અસારવા–કાનપુર સેન્ટ્રલ સ્પેશિયલના ફેરા 1 સપ્ટેમ્બર, 2026 સુધી લંબાવવામાં આવ્યા છે. જ્યારે 01905 કાનપુર સેન્ટ્રલ–અસારવા સ્પેશિયલના ફેરા 31 ઑગસ્ટ, 2026 સુધી ચાલુ રહેશે. આ નિર્ણયથી ગુજરાત અને ઉત્તર પ્રદેશ વચ્ચે આવન-જાવન કરતા મુસાફરોને વિશેષ લાભ મળશે.
2. અસારવા–આગ્રા કેન્ટ સાપ્તાહિક સ્પેશિયલ (ટ્રેન નં. 01909/01910)
01909 અસારવા–આગ્રા કેન્ટ સ્પેશિયલના ફેરા 1 સપ્ટેમ્બર, 2026 સુધી અને 01910 આગ્રા કેન્ટ–અસારવા સ્પેશિયલના ફેરા 31 ઑગસ્ટ, 2026 સુધી લંબાવવામાં આવ્યા છે. આ ટ્રેન આગ્રા, મથુરા અને આસપાસના વિસ્તારોમાંથી ગુજરાત આવનારા મુસાફરો માટે મહત્વપૂર્ણ સેવા પૂરી પાડે છે.
3. અમદાવાદ–દરભંગા સાપ્તાહિક સ્પેશિયલ (ટ્રેન નં. 09465/09466)
બિહાર તરફ મુસાફરી કરતા મુસાફરોની સુવિધા માટે 09465 અમદાવાદ–દરભંગા સ્પેશિયલના ફેરા 11 સપ્ટેમ્બર, 2026 સુધી અને 09466 દરભંગા–અમદાવાદ સ્પેશિયલના ફેરા 14 સપ્ટેમ્બર, 2026 સુધી લંબાવવામાં આવ્યા છે. આ ટ્રેનનો લાભ ખાસ કરીને ગુજરાતમાં કાર્યરત બિહારના શ્રમિકો, વિદ્યાર્થીઓ અને વેપારીઓને મળશે.
4. ગાંધીગ્રામ–પ્રયાગરાજ દ્વિ-સાપ્તાહિક સ્પેશિયલ (ટ્રેન નં. 04112/04111)
04112 ગાંધીગ્રામ–પ્રયાગરાજ સ્પેશિયલના ફેરા 30 ઑગસ્ટ, 2026 સુધી તથા 04111 પ્રયાગરાજ–ગાંધીગ્રામ સ્પેશિયલના ફેરા 29 ઑગસ્ટ, 2026 સુધી લંબાવવામાં આવ્યા છે. આથી ઉત્તર પ્રદેશ અને ગુજરાત વચ્ચે મુસાફરી કરતા લોકોને વધુ સુવિધા મળશે.
બુકિંગ શરૂ
પશ્ચિમ રેલવે દ્વારા જણાવાયું છે કે ઉપરોક્ત તમામ સ્પેશિયલ ટ્રેનોના વિસ્તૃત ફેરાઓ માટે બુકિંગ તમામ પીઆરએસ કાઉન્ટરો તેમજ આઈઆરસીટીસી મારફતે શરૂ થઈ ગઈ છે. મુસાફરોને ટ્રેનના સમય, રોકાણ, કોચની રચના તથા અન્ય વિગતવાર માહિતી માટે www.enquiry.indianrail.gov.in વેબસાઇટની મુલાકાત લેવા વિનંતી કરવામાં આવી છે.
પશ્ચિમ રેલવેનો આ નિર્ણય મુસાફરોને વધુ આરામદાયક અને સુવિધાજનક મુસાફરી ઉપલબ્ધ કરાવવાની દિશામાં મહત્વપૂર્ણ પગલું માનવામાં આવે છે. તહેવારોના સમયગાળા દરમિયાન વધતી મુસાફરીની માંગને પહોંચી વળવા માટે આવા નિર્ણયો મુસાફરો માટે ખૂબ ઉપયોગી સાબિત થશે.
સંવાદદાતા:
સિયારામ જે. શર્મા
ગુજરાત પ્રવાસી ન્યૂઝ, અમદાવાદ
पश्चिम रेलवे ने चार जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के फेरों का किया विस्तार, यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत
अहमदाबाद, 30 जुलाई। यात्रियों की बढ़ती संख्या, आगामी त्योहारी सीजन तथा लंबी दूरी की यात्रा को सुगम बनाने के उद्देश्य से पश्चिम रेलवे ने अहमदाबाद मंडल से संचालित चार जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के फेरों को विस्तारित करने की घोषणा की है। रेलवे के इस निर्णय से गुजरात, उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी। विशेष रूप से रक्षाबंधन, जन्माष्टमी तथा आगामी त्योहारों के दौरान ट्रेनों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए यह फैसला यात्रियों के लिए काफी उपयोगी माना जा रहा है।
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इन स्पेशल ट्रेनों का संचालन पूर्व निर्धारित समय, मार्ग, ठहराव एवं कोच संरचना के अनुसार ही जारी रहेगा। केवल इनके संचालन की अवधि बढ़ाई गई है ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को आरक्षित सीटों की सुविधा मिल सके।
असारवा–कानपुर सेंट्रल साप्ताहिक स्पेशल
ट्रेन संख्या 01906 असारवा–कानपुर सेंट्रल साप्ताहिक स्पेशल के संचालन को 01 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है। वहीं वापसी दिशा में चलने वाली 01905 कानपुर सेंट्रल–असारवा साप्ताहिक स्पेशल 31 अगस्त 2026 तक संचालित होगी। इस ट्रेन के विस्तार से उत्तर प्रदेश से गुजरात आने वाले व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों तथा प्रवासी परिवारों को विशेष सुविधा मिलेगी।
असारवा–आगरा कैंट साप्ताहिक स्पेशल
ट्रेन संख्या 01909 असारवा–आगरा कैंट साप्ताहिक स्पेशल अब 01 सितंबर 2026 तक तथा 01910 आगरा कैंट–असारवा साप्ताहिक स्पेशल 31 अगस्त 2026 तक चलेगी। आगरा, मथुरा और आसपास के क्षेत्रों से गुजरात आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन लंबे समय से महत्वपूर्ण परिवहन साधन रही है। फेरों के विस्तार से यात्रियों को प्रतीक्षा सूची की समस्या से भी काफी राहत मिलने की संभावना है।
अहमदाबाद–दरभंगा साप्ताहिक स्पेशल
बिहार की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 09465 अहमदाबाद–दरभंगा साप्ताहिक स्पेशल के संचालन को 11 सितंबर 2026 तक तथा 09466 दरभंगा–अहमदाबाद साप्ताहिक स्पेशल को 14 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया है। यह ट्रेन गुजरात में कार्यरत बिहार के श्रमिकों, विद्यार्थियों और व्यवसायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। त्योहारों के समय इस ट्रेन में अत्यधिक भीड़ रहती है, जिसे देखते हुए रेलवे ने इसके फेरों का विस्तार किया है।
गांधीग्राम–प्रयागराज द्वि-साप्ताहिक स्पेशल
ट्रेन संख्या 04112 गांधीग्राम–प्रयागराज द्वि-साप्ताहिक स्पेशल अब 30 अगस्त 2026 तक तथा 04111 प्रयागराज–गांधीग्राम स्पेशल 29 अगस्त 2026 तक संचालित होगी। इस निर्णय से प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को गुजरात आने-जाने में अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।
बुकिंग शुरू, यात्रियों से समय-सारिणी देखने की अपील
पश्चिम रेलवे ने बताया है कि इन सभी स्पेशल ट्रेनों के विस्तारित फेरों की बुकिंग सभी पीआरएस (Passenger Reservation System) काउंटरों तथा आईआरसीटीसी के माध्यम से शुरू कर दी गई है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले ट्रेन के समय, ठहराव, कोच संरचना तथा अन्य अद्यतन जानकारी www.enquiry.indianrail.gov.in पर अवश्य देख लें।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए समय-समय पर अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों का संचालन तथा फेरों का विस्तार किया जा रहा है। इससे नियमित ट्रेनों पर दबाव कम होगा, प्रतीक्षा सूची में कमी आएगी और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक एवं सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा।
पश्चिम रेलवे ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे केवल अधिकृत माध्यमों से ही टिकट बुक कराएं तथा यात्रा के दौरान रेलवे द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
संवाददाता : सियाराम जे. शर्मा
गुजरात प्रवासी न्यूज़, अहमदाबाद
AMC बोर्ड बैठक में हंगामा: अवैध पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट और प्री-मानसून तैयारियों पर कांग्रेस पार्षद हितेंद्र पिठाडिया ने प्रशासन को घेरा
अश्विन अग्रवाल, अहमदाबाद: .30 July
अहमदाबाद नगर निगम (AMC) की सामान्य बोर्ड बैठक में आज शहर की प्रशासनिक विफलताओं और जनसुरक्षा के मुद्दों को लेकर जोरदार बहस हुई। कांग्रेस पार्षद हितेंद्र पिठाडिया ने नागरिकों की सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े गंभीर मामलों पर तीखे सवाल उठाते हुए नगर निगम प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया।
अवैध पटाखा फैक्ट्री हादसा:
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग बैठक के दौरान पार्षद हितेंद्र पिठाडिया ने अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट का मुद्दा प्रमुखता से उठाया, जिसमें 9 मासूम लोगों की जान चली गई थी। उन्होंने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही और नियामक तंत्र (regulatory authority) की विफलता करार दिया। पिठाडिया ने मांग की कि शहर में चल रही ऐसी सभी अवैध इकाइयों के खिलाफ तुरंत अभियान चलाकर उन्हें बंद किया जाए और जिनकी लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, उन अधिकारियों व जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। लेकिन इस घटना के चलते शहर की सैकड़ों लाइसेंस प्राप्त दुकानो को भी कई दिनों से सील कर दिया गया है जिससे छोटे दुकानदारों की रोजी रोटी का प्रश्न बना हुआ है, यह सवाल अनछुआ रहा।
प्री-मानसून प्लान और जल निकासी व्यवस्था पर उठाए सवाल :
इसके अलावा, उन्होंने शहर के प्री-मानसून प्लान के क्रियान्वयन पर भी कड़ा विरोध जताया। आपदा प्रबंधन (Disaster Management) और जल निकासी ( गटर व्यवस्था) प्रणाली की तैयारियों में देरी और खामियों को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासनिक ढिलाई का खामियाजा अहमदाबाद की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
साथ ही, बोर्ड बैठक के एजेंडे में शामिल कुछ अन्य प्रस्तावों पर भी उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया और जनहित में फैसले लेने की मांग की।
नेता विपक्ष की दौड़ में आगे दिखे हितेंद्र पिठाडिया:
गौरतलब है कि अहमदाबाद नगर निगम में कांग्रेस अभी तक आधिकारिक रूप से नेता विपक्ष (Leader of Opposition) का चयन नहीं कर पाई है। हालांकि, बोर्ड बैठक में जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि हितेंद्र पिठाडिया इस पद की रेस में सबसे आगे नज़र आ रहे हैं।
149वीं जगन्नाथ रथयात्रा: ‘जगत मामा’ की ऐतिहासिक मामेरा परंपरा का होगा पुनर्स्थापन,
अश्विन अग्रवाल।
गुजरात प्रवासी न्यूज़
अहमदाबाद।
भगवान जगन्नाथ की 149वीं ऐतिहासिक रथयात्रा इस वर्ष एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के पुनर्स्थापन की साक्षी बनेगी। सरसपुर की भगा भगत पोल, मोटी वासण शेरी स्थित रणछोड़ मंदिर में वर्षों बाद रथयात्रा के पारंपरिक निशान के साथ ‘मामेरा (भात)’ की ऐतिहासिक रस्म पुनः आयोजित की जाएगी।
इतिहासकारों और स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, वर्ष 1878 में अहमदाबाद रथयात्रा प्रारंभ होने के समय से भगवान जगन्नाथ के सरसपुर आगमन पर पारंपरिक निशान सबसे पहले भगा भगत पोल स्थित रणछोड़ मंदिर पहुंचता था। यहीं पूजा-अर्चना, आरती तथा भगवान को मामेरा अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती थी।
समय के साथ रथयात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से भगा भगत पोल में स्थान कम पड़ने लगा। इसके चलते पिछले लगभग दो दशकों से भगवान जगन्नाथ का रथ जिस रणछोड़ मंदिर चौराहे पर ठहरता है, वहां मामेरा कार्यक्रम आयोजित होने लगा। इस वर्ष भी जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा वहां का पारंपरिक मामेरा पूर्ववत आयोजित किया जाएगा और उसमें किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
इसी के साथ सरसपुर के स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने जनसहयोग से वर्ष 1878 से जुड़ी मूल परंपरा को उसके ऐतिहासिक स्थल भगा भगत पोल स्थित रणछोड़ मंदिर में पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। आमजन के आर्थिक सहयोग से यहां भी पारंपरिक मामेरा आयोजित किया जाएगा।
इस वर्ष की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि भगवान जगन्नाथ को दो स्थानों पर भात (मामेरा) अर्पित किया जाएगा। पहला, जगत मामा की मूल एवं ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार भगा भगत पोल स्थित रणछोड़ मंदिर में तथा दूसरा, रथयात्रा के दौरान जहां भगवान का रथ परंपरागत रूप से ठहरता है, उस रणछोड़ मंदिर चौराहे पर। दोनों आयोजन अपनी-अपनी परंपरा के अनुसार संपन्न होंगे। इसका उद्देश्य किसी परंपरा को बदलना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करते हुए दोनों धार्मिक परंपराओं का सम्मान बनाए रखना है।
वर्ष 2019 में तत्कालीन महंत लक्ष्मणदासजी, जगन्नाथ मंदिर के गादीपति दिलीपदासजी महाराज तथा ट्रस्टी महेंद्रभाई ने भी इस ऐतिहासिक परंपरा को पुनः प्रारंभ करने पर सकारात्मक सहमति व्यक्त की थी। अब स्थानीय नागरिकों की पहल से यह संकल्प मूर्त रूप लेता दिखाई दे रहा है।
क्या कहते हैं स्थानीय नागरिक
भगा भगत पोल के वरिष्ठ नागरिक कमलेश राणा ने विशेष बातचीत में कहा कि यह किसी व्यक्ति या संस्था का नहीं, बल्कि भगवान और पूरे गांव की आस्था का विषय है। सरसपुर की धार्मिक विरासत और जनआस्था से जुड़ी इस परंपरा का जिस स्थान से प्रारंभ हुआ था, वहीं पुनः आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगा।
बाला हनुमान मंदिर, सरसपुर चरण पादुका महोत्सव समिति के आयोजक हेमेन्द्र बागड़ी ने बताया कि लगातार दूसरे वर्ष चरणपादुका पूजन भी पारंपरिक रूप से सरसपुर में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ अपने मामा के घर आते हैं और उन्हें चरण पादुका पहनाकर श्रद्धालु स्वयं को कृतार्थ मानते हैं। गांव की जनता द्वारा स्वैच्छिक रूप से भगा भगत पोल में भात अर्पित करने की परंपरा का पुनर्जीवन पूरे सरसपुर के लिए गौरव का विषय है। साथ ही रणछोड़ मंदिर चौराहे पर भी पूर्ववत भात का आयोजन होगा।
मोटी वासण शेरी के निवासी नरेशभाई गांठीयावाला ने कहा कि भगवान को मामेरा अर्पित करना केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और परंपरा का प्रतीक है। भगा भगत पोल में पूरा गांव एक साथ अपने भानजे भगवान जगन्नाथ को भात अर्पित करेगा।
उल्लेखनीय है कि इस विषय पर जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी महेंद्रभाई से संपर्क एवं मंदिर में रूबरू मुलाकात का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
इस प्रकार 149वीं जगन्नाथ रथयात्रा में एक ओर जगत मामा की ऐतिहासिक परंपरा का पुनर्स्थापन होगा, तो दूसरी ओर रथयात्रा मार्ग पर वर्षों से चली आ रही वर्तमान परंपरा भी यथावत जारी रहेगी। धार्मिक विरासत को सहेजने की यह पहल इस वर्ष की रथयात्रा को ऐतिहासिक और स्मरणीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गुजरात प्रवासी न्यूज़
अहमदाबाद।
अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मनीषा चौहान सम्मानित
हरिद्वार (उत्तराखंड)। उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मनीषा चौहान को उनकी उत्कृष्ट खेल उपलब्धियों और देश का गौरव बढ़ाने वाले प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड रग्बी एसोसिएशन द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष एवं रग्बी कोच आयुष सैनी ने मनीषा चौहान के आवास पर पहुंचकर शिष्टाचार भेंट की तथा उन्हें रग्बी बॉल भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारत और उत्तराखंड का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।
इस अवसर पर आयुष सैनी ने कहा कि मनीषा चौहान की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड और देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीतना उनके कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उनकी सफलता प्रदेश के हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी का सम्मान करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जो खिलाड़ी देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाते हैं, उनका सम्मान करना प्रत्येक खेल संगठन का नैतिक दायित्व है। उत्तराखंड रग्बी एसोसिएशन सदैव खिलाड़ियों के सम्मान, प्रोत्साहन और खेलों के विकास के लिए प्रतिबद्ध रही है तथा भविष्य में भी इसी भावना के साथ कार्य करती रहेगी।
उत्तराखंड में तेजी से बढ़ रहा है रग्बी का दायरा
आयुष सैनी ने बताया कि उत्तराखंड में रग्बी खेल लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। प्रमुख खेल सचिव अमित सिन्हा के मार्गदर्शन एवं सहयोग से राज्य में रग्बी को नई पहचान मिल रही है। विभिन्न जिलों में प्रशिक्षण शिविर, प्रतियोगिताओं और प्रतिभा खोज कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के रग्बी खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करेंगे।
मनीषा चौहान युवाओं के लिए प्रेरणा
कार्यक्रम में उपस्थित खेलो इंडिया हॉकी सेंटर के कोच सौरभ पटवाल ने भी मनीषा चौहान को उनकी ऐतिहासिक सफलता पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि मनीषा की मेहनत, अनुशासन और समर्पण युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। यदि खिलाड़ी लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें तो वे भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने मनीषा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे आगे भी देश के लिए अनेक उपलब्धियां हासिल करेंगी।
सम्मान से बढ़ता है खिलाड़ियों का मनोबल
सम्मान प्राप्त करने के बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मनीषा चौहान ने उत्तराखंड रग्बी एसोसिएशन एवं आयुष सैनी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का सम्मान उन्हें और अधिक मेहनत करने तथा बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड के खिलाड़ी विभिन्न खेलों में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रोशन करते रहेंगे।
खेल संस्कृति को मजबूत बनाने पर हुई चर्चा
इस अवसर पर खिलाड़ियों के बीच आपसी सहयोग, खेल भावना, विभिन्न खेल संघों के समन्वय तथा उत्तराखंड में खेल संस्कृति को और अधिक मजबूत बनाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। सभी उपस्थित खेल प्रेमियों और पदाधिकारियों ने खेलों के समग्र विकास के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया तथा एक-दूसरे को भविष्य की सफलताओं के लिए शुभकामनाएं दीं।
उत्तराखंड रग्बी एसोसिएशन का यह सम्मान समारोह इस बात का प्रमाण है कि राज्य में विभिन्न खेलों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया जा रहा है। इससे निश्चित रूप से युवा खिलाड़ियों में खेलों के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित होंगे।
रिपोर्ट: डॉ. आलोक कुमार द्विवेदी,
सह संपादक, गुजरात प्रवासी न्यूज़, हरिद्वार
मथुरा के ऐतिहासिक तोशाखाने से हजारों करोड़ के दान और बहुमूल्य आभूषण गायब होने के आरोप, संतों ने दी आंदोलन की चेतावनी
मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में स्थित एक प्राचीन मंदिर के ऐतिहासिक तोशाखाने (खजाने) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के प्रमुख एवं मामले के मुख्य शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में हलचल मचा दी है। आरोप है कि मंदिर के तोशाखाने में वर्षों से सुरक्षित रखे गए हजारों करोड़ रुपये मूल्य के दान, सोने-चांदी के आभूषण, हीरे-जवाहरात तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुएं रहस्यमय तरीके से गायब हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में कई दशकों बाद जब मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक तोशाखाने को खोला गया तो वहां का दृश्य देखकर लोग स्तब्ध रह गए। बताया जा रहा है कि खजाने में रखे कई संदूक खाली मिले तथा जिन डिब्बों में बहुमूल्य आभूषण और रत्न रखे जाने का दावा किया जाता था, उनमें भी कोई सामग्री नहीं मिली। इतना ही नहीं, मंदिर की चल एवं अचल संपत्तियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी गायब पाए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन से जुड़े संत फलाहारी बाबा ने इस पूरे मामले को हिंदू समाज की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को अर्पित किए गए दान का सही हिसाब सामने आना चाहिए। उनका आरोप है कि वर्षों तक उचित निगरानी और सरकारी सील की व्यवस्था न होने का लाभ उठाकर कुछ लोगों ने मंदिर की अमूल्य संपदा को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
संत समाज ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन शुरू किया जाएगा। संतों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर वे आमरण अनशन और भूख हड़ताल का रास्ता अपनाने के लिए भी तैयार हैं। उनका आरोप है कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का दुरुपयोग कर कुछ लोगों ने भारी आर्थिक लाभ अर्जित किया है।
इस विवाद के बीच मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिरों में आने वाले दान, आभूषणों और संपत्तियों का नियमित ऑडिट कराया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके। श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिरों की संपत्तियां समाज की आस्था से जुड़ी होती हैं और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीर है।
वहीं, विभिन्न सामाजिक संगठनों और संतों ने सरकार से मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराई जाए। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए और मंदिर की संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए नई व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
फिलहाल इस पूरे मामले में संबंधित प्रशासन या जांच एजेंसियों की ओर से कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में सभी आरोप जांच के दायरे में हैं। हालांकि, इस प्रकरण ने मथुरा सहित पूरे देश में मंदिर प्रबंधन, दान व्यवस्था और धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
इस समाचार में उल्लिखित तथ्य विभिन्न व्यक्तियों, संतों एवं शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों, दावों तथा उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। संबंधित मामले की जांच एवं सत्यापन सक्षम प्रशासनिक और जांच एजेंसियों द्वारा किया जाना शेष है। जब तक किसी न्यायालय, जांच एजेंसी अथवा प्रशासनिक प्राधिकरण द्वारा आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की जाती, तब तक इन आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। समाचार का उद्देश्य केवल उपलब्ध जानकारी को जनहित में प्रस्तुत करना है।
रिपोर्ट: राहुल शर्मा
चैनल हेड, गुजरात प्रवासी न्यूज़ मथुरा
अहमदाबाद कांग्रेस में विरोध पक्ष नेता को लेकर मंथन तेज, दलित प्रतिनिधित्व पर बढ़ी चर्चा
( अश्विन अग्रवाल) संवाददाता
अहमदाबाद। अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) में नई बोर्ड संरचना के गठन के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में पिछड़ा वर्ग से महापौर और पाटीदार समुदाय से स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन का चयन किया है। हालांकि शहर की राजनीति पर नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निगम प्रशासन में प्रभावशाली निर्णय लेने की शक्ति अब भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हाथों में केंद्रित है।
पिछले दो दशकों से अहमदाबाद नगर निगम पर भाजपा का नियंत्रण है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार निगम की सत्ता संरचना में जैन और पाटीदार समुदायों का प्रभाव लंबे समय से देखा जाता रहा है। वहीं शहर की आबादी में अनुसूचित जाति और मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी उल्लेखनीय होने के बावजूद उन्हें निगम की शीर्ष प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों में प्रतिनिधित्व न के बराबर मिला है।
दूसरी ओर कांग्रेस 32 पार्षदों के साथ निगम में प्रमुख विपक्षी दल है। वर्ष 2021 में कांग्रेस के 24 पार्षद थे और उस समय पार्टी ने शाहज़ाद खान पठान को विरोध पक्ष का नेता नियुक्त किया था। वर्ष 2026 के चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा का मजबूत गढ़ माने जाने वाले खाड़िया वार्ड में जीत दर्ज कर राजनीतिक हलकों का ध्यान आकर्षित किया। पार्टी का वोट प्रतिशत भी बढ़ा, लेकिन वह सत्ता परिवर्तन के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ।
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि इस चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का मतदान प्रतिशत सामान्य से 10 से 15 प्रतिशत अधिक रहा, जबकि अनुसूचित जाति समुदाय का समर्थन कांग्रेस को मिला, लेकिन वह उस स्तर तक नहीं पहुंच सका जिससे निगम के समग्र परिणामों पर निर्णायक प्रभाव पड़ता।
25 जून की बोर्ड बैठक से पहले हो सकता है फैसला

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अहमदाबाद नगर निगम में इस बार दलित समुदाय से विरोध पक्ष नेता नियुक्त करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। निगम बोर्ड की बैठक 25 जून को प्रस्तावित है और माना जा रहा है कि उससे पहले पार्टी इस पद पर निर्णय ले सकती है।
इस संबंध में कांग्रेस शहर अध्यक्ष सोनलबेन पटेल ने बताया, “पार्टी जल्द ही निर्णय लेगी। अभी विरोध पक्ष नेता के चयन को लेकर कोई अंतिम चर्चा नहीं हुई है। विधायक शैलेश परमार का गुट शाहज़ाद खान को दोबारा अवसर देने के पक्ष में हैं, जबकि दूसरे नेताओं का मानना है कि प्रदेश नेतृत्व अपने विवेक से निर्णय करे।”
कई नामों पर चर्चा
पार्टी सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ पार्षद नीरव बक्षी का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल था। लेकिन सोशल मीडिया पर बक्शी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस्राइल की प्रशंसा के चलते मुस्लिमों में विरोध देखा जा रहा है
बक्षी का एक स्क्रीन शॉट तेजी से वायरल चल रहा है पोस्ट में इस्राइल सेना द्वारा गाज़ा में बमबारी का वीडियो है वीडियो पर बक्षी टिप्पणी करते लिखते हैं “मोदी जी हमें भी देश की सुरक्षा के लिए इस्राइल की तरह वामपंथी पत्रकारों को अरेस्ट कर देश द्रोह का मुकदमा चलाकर फांसी पर लटकाना होगा
बहुत इज्ज़त दे दी मानव अधिकार वालों और प्रेस फ्रीडम को
राष्ट्र प्रथम”
इस वायरल स्क्रीन शॉट के चलते बक्षी को मुस्लिमों का विरोध झेलना पड़ रहा है और मुस्लिम नेताओं ने बक्षी की सिफारिश से हाथ पीछे खींच लिए हैं
हालांकि अंतिम निर्णय प्रदेश नेतृत्व के स्तर पर लिया जाना है। दरियापुर, खाड़िया और जमालपुर क्षेत्र के कांग्रेस पार्षदों ने भी चयन का अधिकार प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा और राज्य नेतृत्व पर छोड़ दिया है।
सूत्रों का कहना है कि दाणीलीमडा, बहरामपुर, गोमतीपुर और रखियाल वार्ड के कई पार्षदों ने शाहज़ाद खान के नाम की सिफारिश की है। वर्तमान निगम में कांग्रेस के 18 मुस्लिम और 7 अनुसूचित जाति समुदाय से निर्वाचित पार्षद हैं।
चुनाव के बाद मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों ने मुस्लिम नेता को विरोध पक्ष का नेता बनाने की मांग उठाई थी। हालांकि अब दलित समुदाय के प्रतिनिधित्व की मांग अधिक मुखर होकर सामने आ रही है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन पर विचार कर रहा है।
दलित नेता को मिल सकता है मौका
सोनलबेन पटेल का कहना है कि, “शाहज़ाद खान को पहले अवसर मिल चुका है। कांग्रेस में सभी नेता पार्टी के चुनाव चिन्ह पर जीतकर आते हैं। अंतिम निर्णय प्रदेश नेतृत्व और वरिष्ठ पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक द्वारा लिया जाएगा।”
वहीं नीरव बक्षी ने कहा, “विरोध पक्ष नेता के चयन की प्रक्रिया चल रही है। नियुक्ति एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है। हम भी पार्टी के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।”
कांग्रेस के सात दलित पार्षदों में चार पुरुष और तीन महिला पार्षद शामिल हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि भाजपा द्वारा हितेश बारोट को महापौर बनाए जाने के बाद कांग्रेस भी संभवतः पुरुष पार्षद को विरोध पक्ष नेता की जिम्मेदारी सौंप सकती है।
दलित समुदाय से निर्वाचित पार्षदों में देवेंद्र विषनगरी दूसरे कार्यकाल के पार्षद हैं, जबकि अन्य पहली बार निगम पहुंचे हैं। वहीं मक्तमपुरा वार्ड से निर्वाचित हितेंद्र पिठड़िया का नाम भी चर्चा में है। वे कांग्रेस प्रदेश अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष हैं, प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस की कमजोर स्थिति को देखते हुए दलित-मुस्लिम सामाजिक समीकरण भविष्य में पार्टी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। ऐसे में विरोध पक्ष नेता का चयन केवल संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि आगामी चुनावों की दिशा तय करने वाला राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। अहमदाबाद में विरोध पक्ष नेता चयन में प्रदेश प्रमुख अमित चावड़ा की अहम भूमिका होगी क्यूंकि अधिकतर पार्षदों ने उन्हें विरोध पक्ष नेता चुनने का अधिकार दे दिया है|


















