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વલસાડના અંભેટી કૃષિ વિજ્ઞાન કેન્દ્ર ખાતે ભાજપ પ્રદેશ અધ્યક્ષ જગદીશભાઈ વિશ્વકર્માનો ખેડૂતો સાથે સંવાદ

વલસાડ, ગુજરાત પ્રવાસી ન્યૂઝ (અમદાવાદ બ્યુરો):

ગુજરાત ભાજપના પ્રદેશ અધ્યક્ષ જગદીશભાઈ વિશ્વકર્માએ ગઇકાલે વલસાડ જિલ્લાના અંભેટી ખાતે આવેલ કૃષિ વિજ્ઞાન કેન્દ્રની મુલાકાત લઈને જિલ્લાના ખેડૂત ભાઈ-બહેનો સાથે પ્રાકૃતિક ખેતી વિષયક મહત્વપૂર્ણ સંવાદ યોજ્યો હતો. આ મુલાકાત દરમિયાન તેમણે ખેતી ક્ષેત્રમાં વધી રહેલા રાસાયણિક ખાતરો અને જંતુનાશક દવાઓના ઉપયોગથી ઊભા થતા પડકારો અંગે ચિંતા વ્યક્ત કરી હતી અને ખેડૂતોને પ્રાકૃતિક તથા ટકાઉ ખેતી પદ્ધતિઓ અપનાવવા માટે પ્રેરિત કર્યા હતા.

કાર્યક્રમ દરમિયાન જગદીશભાઈ વિશ્વકર્માએ જણાવ્યું હતું કે છેલ્લા કેટલાક વર્ષોમાં ખેતીમાં રાસાયણિક ખાતરો અને કીટનાશકોનો વધતો ઉપયોગ જમીનની ફળદ્રુપતા ઘટાડવા ઉપરાંત પર્યાવરણ અને માનવ સ્વાસ્થ્ય માટે પણ ગંભીર પડકારો ઊભા કરી રહ્યો છે. તેમણે જણાવ્યું કે પ્રાકૃતિક ખેતી માત્ર ખેતીની પદ્ધતિ નથી, પરંતુ સ્વસ્થ સમાજ અને સ્વસ્થ ભવિષ્ય તરફનું મહત્વપૂર્ણ પગલું છે.

તેમણે ખેડૂતો સાથે સીધી ચર્ચા કરીને પ્રાકૃતિક ખેતીના વિવિધ લાભોની વિસ્તૃત માહિતી આપી હતી. તેમણે જણાવ્યું કે પ્રાકૃતિક ખેતીથી જમીનની જૈવિક શક્તિ જળવાઈ રહે છે, ઉત્પાદન ખર્ચમાં ઘટાડો થાય છે, પાકની ગુણવત્તામાં વધારો થાય છે તેમજ ખેડૂતોને બજારમાં સારી કિંમત મળવાની શક્યતા પણ વધે છે. સાથે સાથે આ પદ્ધતિ પર્યાવરણને અનુકૂળ હોવાથી આગામી પેઢીઓ માટે ખેતીને વધુ ટકાઉ બનાવી શકે છે.

સંવાદ દરમિયાન અનેક ખેડૂતો દ્વારા પોતાના અનુભવો અને પ્રશ્નો રજૂ કરવામાં આવ્યા હતા. કેટલાક ખેડૂતો દ્વારા પ્રાકૃતિક ખેતી અપનાવ્યા બાદ થયેલા લાભો અંગે માહિતી આપવામાં આવી હતી. આ પ્રસંગે કૃષિ નિષ્ણાતોએ પણ ખેડૂતોને માર્ગદર્શન આપ્યું અને પ્રાકૃતિક ખેતી સાથે જોડાયેલી વિવિધ ટેકનિકો વિશે સમજણ આપી હતી.

જગદીશભાઈ વિશ્વકર્માએ ખેડૂતોમાં પ્રાકૃતિક ખેતી પ્રત્યે વધતા રસ અને જાગૃતિ અંગે આનંદ વ્યક્ત કરતાં જણાવ્યું હતું કે રાજ્યભરના ખેડૂતો હવે પરંપરાગત અને પર્યાવરણમૈત્રી ખેતી પદ્ધતિઓ તરફ આગળ વધી રહ્યા છે, જે કૃષિ ક્ષેત્ર માટે સકારાત્મક સંકેત છે. તેમણે કેન્દ્ર અને રાજ્ય સરકાર દ્વારા ખેડૂતોને પ્રાકૃતિક ખેતી માટે આપવામાં આવતી સહાય અને પ્રોત્સાહન યોજનાઓનો પણ ઉલ્લેખ કર્યો હતો.

આ પ્રસંગે કૃષિ વિજ્ઞાન કેન્દ્ર દ્વારા ખેડૂતોને આપવામાં આવતી તાલીમ, માર્ગદર્શન અને નવીન કૃષિ પદ્ધતિઓના પ્રસાર માટે કરવામાં આવતી કામગીરીની પ્રશંસા કરવામાં આવી હતી. કાર્યક્રમમાં મોટી સંખ્યામાં ખેડૂતો, કૃષિ વૈજ્ઞાનિકો અને સ્થાનિક આગેવાનો ઉપસ્થિત રહ્યા હતા.

પ્રાકૃતિક ખેતી અંગે યોજાયેલા આ સંવાદ કાર્યક્રમથી ખેડૂતોને નવી દિશા અને પ્રેરણા મળી હોવાનું માનવામાં આવે છે. કૃષિ ક્ષેત્રમાં પર્યાવરણ અને સ્વાસ્થ્યને અનુકૂળ ખેતી પદ્ધતિઓને પ્રોત્સાહન આપવા માટે આવા કાર્યક્રમો મહત્વપૂર્ણ સાબિત થઈ રહ્યા છે.

રિપોર્ટ: ગુજરાત પ્રવાસી ન્યૂઝ
અમદાવાદ બ્યુરો     

मथुरा के ऐतिहासिक तोशाखाने से हजारों करोड़ के दान और बहुमूल्य आभूषण गायब होने के आरोप, संतों ने दी आंदोलन की चेतावनी

मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में स्थित एक प्राचीन मंदिर के ऐतिहासिक तोशाखाने (खजाने) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के प्रमुख एवं मामले के मुख्य शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में हलचल मचा दी है। आरोप है कि मंदिर के तोशाखाने में वर्षों से सुरक्षित रखे गए हजारों करोड़ रुपये मूल्य के दान, सोने-चांदी के आभूषण, हीरे-जवाहरात तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुएं रहस्यमय तरीके से गायब हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में कई दशकों बाद जब मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक तोशाखाने को खोला गया तो वहां का दृश्य देखकर लोग स्तब्ध रह गए। बताया जा रहा है कि खजाने में रखे कई संदूक खाली मिले तथा जिन डिब्बों में बहुमूल्य आभूषण और रत्न रखे जाने का दावा किया जाता था, उनमें भी कोई सामग्री नहीं मिली। इतना ही नहीं, मंदिर की चल एवं अचल संपत्तियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी गायब पाए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन से जुड़े संत फलाहारी बाबा ने इस पूरे मामले को हिंदू समाज की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को अर्पित किए गए दान का सही हिसाब सामने आना चाहिए। उनका आरोप है कि वर्षों तक उचित निगरानी और सरकारी सील की व्यवस्था न होने का लाभ उठाकर कुछ लोगों ने मंदिर की अमूल्य संपदा को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

संत समाज ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन शुरू किया जाएगा। संतों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर वे आमरण अनशन और भूख हड़ताल का रास्ता अपनाने के लिए भी तैयार हैं। उनका आरोप है कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का दुरुपयोग कर कुछ लोगों ने भारी आर्थिक लाभ अर्जित किया है।

इस विवाद के बीच मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिरों में आने वाले दान, आभूषणों और संपत्तियों का नियमित ऑडिट कराया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके। श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिरों की संपत्तियां समाज की आस्था से जुड़ी होती हैं और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीर है।

वहीं, विभिन्न सामाजिक संगठनों और संतों ने सरकार से मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराई जाए। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए और मंदिर की संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए नई व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

फिलहाल इस पूरे मामले में संबंधित प्रशासन या जांच एजेंसियों की ओर से कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में सभी आरोप जांच के दायरे में हैं। हालांकि, इस प्रकरण ने मथुरा सहित पूरे देश में मंदिर प्रबंधन, दान व्यवस्था और धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

अस्वीकरण (Disclaimer):
इस समाचार में उल्लिखित तथ्य विभिन्न व्यक्तियों, संतों एवं शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों, दावों तथा उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। संबंधित मामले की जांच एवं सत्यापन सक्षम प्रशासनिक और जांच एजेंसियों द्वारा किया जाना शेष है। जब तक किसी न्यायालय, जांच एजेंसी अथवा प्रशासनिक प्राधिकरण द्वारा आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की जाती, तब तक इन आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। समाचार का उद्देश्य केवल उपलब्ध जानकारी को जनहित में प्रस्तुत करना है।

रिपोर्ट: राहुल शर्मा
चैनल हेड, गुजरात प्रवासी न्यूज़ मथुरा

अहमदाबाद कांग्रेस में विरोध पक्ष नेता को लेकर मंथन तेज, दलित प्रतिनिधित्व पर बढ़ी चर्चा

( अश्विन अग्रवाल) संवाददाता
अहमदाबाद। अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) में नई बोर्ड संरचना के गठन के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में पिछड़ा वर्ग से महापौर और पाटीदार समुदाय से स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन का चयन किया है। हालांकि शहर की राजनीति पर नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निगम प्रशासन में प्रभावशाली निर्णय लेने की शक्ति अब भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हाथों में केंद्रित है।
पिछले दो दशकों से अहमदाबाद नगर निगम पर भाजपा का नियंत्रण है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार निगम की सत्ता संरचना में जैन और पाटीदार समुदायों का प्रभाव लंबे समय से देखा जाता रहा है। वहीं शहर की आबादी में अनुसूचित जाति और मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी उल्लेखनीय होने के बावजूद उन्हें निगम की शीर्ष प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों में प्रतिनिधित्व न के बराबर मिला है।
दूसरी ओर कांग्रेस 32 पार्षदों के साथ निगम में प्रमुख विपक्षी दल है। वर्ष 2021 में कांग्रेस के 24 पार्षद थे और उस समय पार्टी ने शाहज़ाद खान पठान को विरोध पक्ष का नेता नियुक्त किया था। वर्ष 2026 के चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा का मजबूत गढ़ माने जाने वाले खाड़िया वार्ड में जीत दर्ज कर राजनीतिक हलकों का ध्यान आकर्षित किया। पार्टी का वोट प्रतिशत भी बढ़ा, लेकिन वह सत्ता परिवर्तन के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ।
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि इस चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का मतदान प्रतिशत सामान्य से 10 से 15 प्रतिशत अधिक रहा, जबकि अनुसूचित जाति समुदाय का समर्थन कांग्रेस को मिला, लेकिन वह उस स्तर तक नहीं पहुंच सका जिससे निगम के समग्र परिणामों पर निर्णायक प्रभाव पड़ता।

25 जून की बोर्ड बैठक से पहले हो सकता है फैसला

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अहमदाबाद नगर निगम में इस बार दलित समुदाय से विरोध पक्ष नेता नियुक्त करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। निगम बोर्ड की बैठक 25 जून को प्रस्तावित है और माना जा रहा है कि उससे पहले पार्टी इस पद पर निर्णय ले सकती है।
इस संबंध में कांग्रेस शहर अध्यक्ष सोनलबेन पटेल ने बताया, “पार्टी जल्द ही निर्णय लेगी। अभी विरोध पक्ष नेता के चयन को लेकर कोई अंतिम चर्चा नहीं हुई है। विधायक शैलेश परमार का गुट शाहज़ाद खान को दोबारा अवसर देने के पक्ष में हैं, जबकि दूसरे नेताओं का मानना है कि प्रदेश नेतृत्व अपने विवेक से निर्णय करे।”
कई नामों पर चर्चा
पार्टी सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ पार्षद नीरव बक्षी का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल था। लेकिन सोशल मीडिया पर बक्शी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस्राइल की प्रशंसा के चलते मुस्लिमों में विरोध देखा जा रहा है

बक्षी का एक स्क्रीन शॉट तेजी से वायरल चल रहा है पोस्ट में इस्राइल सेना द्वारा गाज़ा में बमबारी का वीडियो है वीडियो पर बक्षी टिप्पणी करते लिखते हैं “मोदी जी हमें भी देश की सुरक्षा के लिए इस्राइल की तरह वामपंथी पत्रकारों को अरेस्ट कर देश द्रोह का मुकदमा चलाकर फांसी पर लटकाना होगा
बहुत इज्ज़त दे दी मानव अधिकार वालों और प्रेस फ्रीडम को
राष्ट्र प्रथम”
इस वायरल स्क्रीन शॉट के चलते बक्षी को मुस्लिमों का विरोध झेलना पड़ रहा है और मुस्लिम नेताओं ने बक्षी की सिफारिश से हाथ पीछे खींच लिए हैं
हालांकि अंतिम निर्णय प्रदेश नेतृत्व के स्तर पर लिया जाना है। दरियापुर, खाड़िया और जमालपुर क्षेत्र के कांग्रेस पार्षदों ने भी चयन का अधिकार प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा और राज्य नेतृत्व पर छोड़ दिया है।
सूत्रों का कहना है कि दाणीलीमडा, बहरामपुर, गोमतीपुर और रखियाल वार्ड के कई पार्षदों ने शाहज़ाद खान के नाम की सिफारिश की है। वर्तमान निगम में कांग्रेस के 18 मुस्लिम और 7 अनुसूचित जाति समुदाय से निर्वाचित पार्षद हैं।
चुनाव के बाद मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों ने मुस्लिम नेता को विरोध पक्ष का नेता बनाने की मांग उठाई थी। हालांकि अब दलित समुदाय के प्रतिनिधित्व की मांग अधिक मुखर होकर सामने आ रही है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन पर विचार कर रहा है।
दलित नेता को मिल सकता है मौका
सोनलबेन पटेल का कहना है कि, “शाहज़ाद खान को पहले अवसर मिल चुका है। कांग्रेस में सभी नेता पार्टी के चुनाव चिन्ह पर जीतकर आते हैं। अंतिम निर्णय प्रदेश नेतृत्व और वरिष्ठ पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक द्वारा लिया जाएगा।”
वहीं नीरव बक्षी ने कहा, “विरोध पक्ष नेता के चयन की प्रक्रिया चल रही है। नियुक्ति एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है। हम भी पार्टी के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।”
कांग्रेस के सात दलित पार्षदों में चार पुरुष और तीन महिला पार्षद शामिल हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि भाजपा द्वारा हितेश बारोट को महापौर बनाए जाने के बाद कांग्रेस भी संभवतः पुरुष पार्षद को विरोध पक्ष नेता की जिम्मेदारी सौंप सकती है।
दलित समुदाय से निर्वाचित पार्षदों में देवेंद्र विषनगरी दूसरे कार्यकाल के पार्षद हैं, जबकि अन्य पहली बार निगम पहुंचे हैं। वहीं मक्तमपुरा वार्ड से निर्वाचित हितेंद्र पिठड़िया का नाम भी चर्चा में है। वे कांग्रेस प्रदेश अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष हैं, प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस की कमजोर स्थिति को देखते हुए दलित-मुस्लिम सामाजिक समीकरण भविष्य में पार्टी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। ऐसे में विरोध पक्ष नेता का चयन केवल संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि आगामी चुनावों की दिशा तय करने वाला राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। अहमदाबाद में विरोध पक्ष नेता चयन में प्रदेश प्रमुख अमित चावड़ा की अहम भूमिका होगी क्यूंकि अधिकतर पार्षदों ने उन्हें विरोध पक्ष नेता चुनने का अधिकार दे दिया है|

जनता दर्शन: जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी ने सुनीं जनसमस्याएं, मौके पर किया त्वरित निस्तारण

रिपोर्ट: प्रेम सिंह कुंतल | गुजरात प्रवासी न्यूज़,

मथुरा। जनसेवा और किसान हितैषी कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी ने शनिवार को आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में क्षेत्रवासियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और कई मामलों का मौके पर ही समाधान कराया। कार्यक्रम में एक दर्जन से अधिक गांवों के ग्राम प्रधानों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याएं और शिकायतें लेकर पहुंचे।

जनता दर्शन का आयोजन मंडी चौराहा स्थित आनंदधाम कॉलोनी में स्थित उनके आवास तथा केएम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कार्यालय में किया गया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ने लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित विभागों से जुड़े कई मामलों का तत्काल निस्तारण कराया, जबकि जटिल मामलों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

कार्यक्रम में पहुंचे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने गांवों में नाली एवं खड़ंजा निर्माण, पेयजल व्यवस्था, सुचारू विद्युत आपूर्ति, जलभराव की समस्या तथा ग्रामीण संपर्क मार्गों की खराब स्थिति जैसी अनेक समस्याएं जिला पंचायत अध्यक्ष के समक्ष रखीं। किशन चौधरी ने सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और निर्धारित समय सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी ने कहा कि क्षेत्र का सर्वांगीण विकास और आमजन की समस्याओं का समाधान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जनता की सेवा ही उनका लक्ष्य है और प्रत्येक नागरिक की समस्या को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना एवं हल किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विकास कार्यों की गति को और तेज किया जाएगा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

जनता दर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, ग्राम प्रधानों, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति रही। लोगों ने जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा समस्याओं को गंभीरता से सुनने और त्वरित कार्रवाई करने की सराहना करते हुए इसे जनहित में महत्वपूर्ण पहल बताया।

આંતરરાષ્ટ્રીય યોગ દિવસ પર અમદાવાદ મંડળની અનોખી પહેલ

રિપોર્ટ: ગુજરાત પ્રવાસી ન્યૂઝ, અમદાવાદ બ્યુરો

અમદાવાદ, 20 જૂન 2026: આંતરરાષ્ટ્રીય યોગ દિવસ-2026ની ઉજવણીને અનોખી અને વ્યાપક બનાવવા માટે પશ્ચિમ રેલવેના અમદાવાદ મંડળ દ્વારા વિશેષ આયોજન કરવામાં આવ્યું છે. 21 જૂનના રોજ મંડળના વિવિધ રેલવે પરિસરો, રેલવે ઇન્સ્ટિટ્યૂટો અને સમુદાય ભવનોમાં યોગ સત્રો યોજાશે. એટલું જ નહીં, પ્રથમ વખત ચાર વંદે ભારત એક્સપ્રેસ ટ્રેનોમાં પણ યોગ કાર્યક્રમોનું આયોજન કરવામાં આવશે, જેના દ્વારા મુસાફરોને યોગ અને પ્રાણાયામના લાભો વિશે જાગૃત કરવામાં આવશે.

મંડળ રેલ પ્રબંધક શ્રી વેદ પ્રકાશના માર્ગદર્શન હેઠળ આયોજિત આ કાર્યક્રમોનો મુખ્ય હેતુ રેલવે કર્મચારીઓ, તેમના પરિવારજનો તેમજ મુસાફરોમાં સ્વાસ્થ્ય પ્રત્યે જાગૃતિ લાવવાનો અને યોગને દૈનિક જીવનનો અભિન્ન ભાગ બનાવવા માટે પ્રેરણા આપવાનો છે.

વિવિધ સ્થળોએ યોજાશે સામૂહિક યોગ કાર્યક્રમો

અમદાવાદ મંડળના મુખ્ય સ્થળોએ સામૂહિક યોગ અભ્યાસનું આયોજન કરવામાં આવ્યું છે. જેમાં સામુદાયિક ભવન સાબરમતી, ઓલ્ડ રેલવે ઇન્સ્ટિટ્યૂટ સાબરમતી, રેલવે ઇન્સ્ટિટ્યૂટ કાંકરિયા, સામુદાયિક ભવન ગાંધીધામ અને સામુદાયિક ભવન વિરમગામનો સમાવેશ થાય છે.

આ સ્થળોએ યોગ નિષ્ણાતોના માર્ગદર્શન હેઠળ યોગાસન, પ્રાણાયામ અને ધ્યાન જેવી પ્રવૃત્તિઓ યોજાશે. મોટી સંખ્યામાં રેલવે કર્મચારીઓ, અધિકારીઓ, તેમના પરિવારજનો અને સ્થાનિક નાગરિકો ભાગ લે તેવી અપેક્ષા વ્યક્ત કરવામાં આવી છે.

ચાલતી વંદે ભારત ટ્રેનોમાં યોગની અનોખી પહેલ

આ વર્ષે અમદાવાદ મંડળની સૌથી વિશેષ પહેલ ચાર પ્રતિષ્ઠિત વંદે ભારત એક્સપ્રેસ ટ્રેનોમાં યોગ સત્રોનું આયોજન છે. મુસાફરોને તેમની મુસાફરી દરમિયાન જ યોગના લાભોનો અનુભવ કરાવવા માટે આ અનોખું આયોજન કરવામાં આવ્યું છે.

જે ટ્રેનોમાં યોગ સત્રો યોજાશે તેમાં ગાડી સંખ્યા 20902 ગાંધીનગર કેપિટલ–મુંબઈ સેન્ટ્રલ વંદે ભારત એક્સપ્રેસ, 12462 સાબરમતી–જોધપુર વંદે ભારત એક્સપ્રેસ, 26964 અસારવા–ઉદયપુર વંદે ભારત એક્સપ્રેસ અને 22925 અમદાવાદ–ઓખા વંદે ભારત એક્સપ્રેસનો સમાવેશ થાય છે.

આ ટ્રેનોમાં મુસાફરોને યોગ પ્રશિક્ષકો દ્વારા બેઠક પર બેસીને કરી શકાય તેવા સરળ યોગાસનો, શ્વાસ પ્રક્રિયાઓ અને પ્રાણાયામની તાલીમ આપવામાં આવશે. લાંબી મુસાફરી દરમિયાન થતો થાક, તણાવ અને શારીરિક અસ્વસ્થતા ઘટાડવામાં આવા યોગાભ્યાસ ખૂબ ઉપયોગી સાબિત થશે.

યોગ દ્વારા સ્વસ્થ જીવનનો સંદેશ

પશ્ચિમ રેલવેનું માનવું છે કે યોગ માત્ર શારીરિક કસરત નથી, પરંતુ તે માનસિક શાંતિ, આત્મવિશ્વાસ અને જીવનમાં સંતુલન જાળવવાનો શ્રેષ્ઠ માર્ગ છે. આજના વ્યસ્ત જીવનમાં યોગ વ્યક્તિને શારીરિક અને માનસિક રીતે મજબૂત બનાવે છે.

આ કાર્યક્રમ દ્વારા મુસાફરો અને રેલવે કર્મચારીઓને નિયમિત યોગાભ્યાસ અપનાવવા માટે પ્રોત્સાહિત કરવામાં આવશે, જેથી તેઓ વધુ સ્વસ્થ અને સક્રિય જીવન જીવી શકે.

અગાઉ પણ સફળ રહ્યા છે યોગ કાર્યક્રમો

અમદાવાદ મંડળ દ્વારા અગાઉ અમદાવાદ, મહેસાણા, પાલનપુર અને ગાંધીધામ સહિતના વિવિધ સ્ટેશનો પર યોગ અભ્યાસ શિબિરોનું સફળ આયોજન કરવામાં આવ્યું હતું. આ કાર્યક્રમોમાં રેલવે કર્મચારીઓ અને મુસાફરોએ ઉત્સાહપૂર્વક ભાગ લીધો હતો અને યોગ પ્રત્યે સકારાત્મક પ્રતિસાદ આપ્યો હતો.

“Yoga for Healthy Ageing” થીમને મળશે પ્રોત્સાહન

આંતરરાષ્ટ્રીય યોગ દિવસ-2026ની વૈશ્વિક થીમ “Yoga for Healthy Ageing” છે. આ થીમનો મુખ્ય ઉદ્દેશ વધતી ઉંમરમાં પણ લોકો સ્વસ્થ, સક્રિય અને આત્મનિર્ભર રહે તે માટે યોગને જીવનશૈલીનો ભાગ બનાવવાનો છે.

પશ્ચિમ રેલવેનું અમદાવાદ મંડળ આ થીમને અનુરૂપ સ્વસ્થ જીવનશૈલી અને સામૂહિક કલ્યાણનો સંદેશ સમાજના દરેક વર્ગ સુધી પહોંચાડવા માટે પ્રતિબદ્ધ છે.

પશ્ચિમ રેલવે દ્વારા તમામ રેલ મુસાફરો, રેલવે કર્મચારીઓ અને તેમના પરિવારજનોને આ યોગ સત્રોમાં સક્રિય સહભાગી બનવા અને સ્વસ્થ ભારતના નિર્માણમાં પોતાનું યોગદાન આપવા અપીલ કરવામાં આવી છે.

રેલવે પરિસરોથી લઈને દેશની અદ્યતન વંદે ભારત ટ્રેનો સુધી યોગનો સંદેશ પહોંચાડતી અમદાવાદ મંડળની આ અનોખી પહેલ આંતરરાષ્ટ્રીય યોગ દિવસની ઉજવણીને વધુ અર્થપૂર્ણ અને જનકેન્દ્રિત બનાવશે.

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर अहमदाबाद मंडल की अनूठी पहल

रिपोर्ट: गुजरात प्रवासी न्यूज़, अहमदाबाद ब्यूरो

अहमदाबाद। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के अवसर पर पश्चिम रेलवे का अहमदाबाद मंडल एक विशेष और अभिनव पहल करने जा रहा है। 21 जून को मंडल के विभिन्न रेलवे परिसरों, सामुदायिक भवनों और रेलवे संस्थानों में बड़े स्तर पर योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही पहली बार चार वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों में भी योग सत्र आयोजित कर यात्रियों को यात्रा के दौरान योग और प्राणायाम के महत्व से अवगत कराया जाएगा।

पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल रेल कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए लाभकारी होगा, बल्कि हजारों रेल यात्रियों तक भी स्वस्थ जीवनशैली का संदेश पहुंचाएगा। मंडल रेल प्रबंधक श्री वेद प्रकाश के मार्गदर्शन में आयोजित किए जा रहे इन कार्यक्रमों का उद्देश्य योग को जन-जन तक पहुंचाना और लोगों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करना है।

मंडल के विभिन्न केंद्रों पर होंगे सामूहिक योग कार्यक्रम

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अहमदाबाद मंडल के प्रमुख रेलवे परिसरों में सामूहिक योग अभ्यास का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में रेल कर्मचारी, अधिकारी, उनके परिवारजन तथा स्थानीय नागरिक भाग लेंगे।

योग कार्यक्रमों के लिए जिन प्रमुख स्थलों का चयन किया गया है, उनमें सामुदायिक भवन साबरमती, ओल्ड रेलवे इंस्टीट्यूट साबरमती, रेलवे इंस्टीट्यूट कांकरिया, सामुदायिक भवन गांधीधाम तथा सामुदायिक भवन वीरमगाम शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर प्रशिक्षित योग विशेषज्ञों द्वारा योगाभ्यास, प्राणायाम और ध्यान संबंधी गतिविधियां कराई जाएंगी।

चलती वंदे भारत ट्रेनों में योग का अनूठा प्रयोग

इस वर्ष अहमदाबाद मंडल की सबसे विशेष पहल चलती हुई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों में योग सत्रों का आयोजन है। रेलवे का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली और व्यस्त दिनचर्या के कारण लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है। इसी सोच के तहत यात्रियों को यात्रा के दौरान ही योग के लाभों से परिचित कराने का निर्णय लिया गया है।

चार प्रमुख वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों में यह विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा। इनमें गाड़ी संख्या 20902 गांधीनगर कैपिटल–मुंबई सेंट्रल वंदे भारत एक्सप्रेस, गाड़ी संख्या 12462 साबरमती–जोधपुर वंदे भारत एक्सप्रेस, गाड़ी संख्या 26964 असारवा–उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस तथा गाड़ी संख्या 22925 अहमदाबाद–ओखा वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल हैं।

इन ट्रेनों में प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक यात्रियों को सीट पर बैठे-बैठे किए जाने वाले सरल योगासन, श्वास संबंधी व्यायाम तथा प्राणायाम का अभ्यास कराएंगे। इससे यात्रियों को यात्रा के दौरान तनाव कम करने, शरीर को सक्रिय रखने तथा मानसिक शांति प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

यात्रियों को मिलेगा स्वस्थ जीवनशैली का संदेश

रेलवे प्रशासन का मानना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने की एक प्रभावी पद्धति है। यात्रा के दौरान लंबे समय तक बैठने से होने वाली शारीरिक थकान और मानसिक तनाव को कम करने में योग अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इसी उद्देश्य से यात्रियों को योग के प्रति प्रेरित करने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

पूर्व में भी सफल रहे हैं योग कार्यक्रम

अहमदाबाद मंडल पहले भी योग और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन में अग्रणी रहा है। पूर्व वर्षों में अहमदाबाद, महेसाणा, पालनपुर और गांधीधाम सहित विभिन्न रेलवे स्टेशनों एवं परिसरों में योग शिविरों का आयोजन किया गया था। इन कार्यक्रमों में रेल कर्मचारियों, अधिकारियों और यात्रियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर योग के प्रति अपनी रुचि दिखाई थी।

“Yoga for Healthy Ageing” थीम को मिलेगा बल

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की वैश्विक थीम “Yoga for Healthy Ageing” निर्धारित की गई है। इस थीम का उद्देश्य बढ़ती आयु में भी लोगों को स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने के लिए योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना है। अहमदाबाद मंडल के कार्यक्रम इसी थीम के अनुरूप आयोजित किए जा रहे हैं।

पश्चिम रेलवे का अहमदाबाद मंडल योग के माध्यम से स्वस्थ समाज के निर्माण और जनकल्याण के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मंडल प्रशासन ने सभी रेल कर्मचारियों, यात्रियों तथा आम नागरिकों से अपील की है कि वे योग दिवस के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करें और योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाला यह विशेष अभियान रेलवे की सामाजिक जिम्मेदारी, स्वास्थ्य जागरूकता और जनहित के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। रेलवे परिसरों से लेकर देश की आधुनिक वंदे भारत ट्रेनों तक योग का संदेश पहुंचाने वाली यह पहल निश्चित रूप से यात्रियों और कर्मचारियों के बीच स्वास्थ्य के प्रति नई जागरूकता पैदा करेगी।

સાબરમતી–લાલગઢ દૈનિક એક્સપ્રેસની શરૂઆતથી ગુજરાત–રાજસ્થાન વચ્ચે રેલ સંપર્કને મળશે નવી ગતિ રેલમંત્રી અશ્વિની વૈષ્ણવ 21 જૂને બીકાનેરથી કરશે પ્રારંભ, મુસાફરો માટે સીધી અને સુવિધાજનક સફરની નવી ભેટ

રિપોર્ટ: ગુજરાત પ્રવાસી ન્યૂઝ, અમદાવાદ બ્યુરો

અમદાવાદ: ભારતીય રેલવે દ્વારા મુસાફરોની સુવિધા અને પ્રાદેશિક કનેક્ટિવિટીને વધુ મજબૂત બનાવવા માટે વધુ એક મહત્વપૂર્ણ પહેલ હાથ ધરવામાં આવી છે. ગુજરાતના સાબરમતી (અમદાવાદ) અને રાજસ્થાનના લાલગઢ (બીકાનેર) વચ્ચે નવી દૈનિક એક્સપ્રેસ ટ્રેન સેવા શરૂ થવા જઈ રહી છે. કેન્દ્રીય રેલમંત્રી શ્રી અશ્વિની વૈષ્ણવ 21 જૂન, 2026ના રોજ બીકાનેરથી આ નવી ટ્રેન સેવાને લીલી ઝંડી બતાવી પ્રસ્થાન કરાવશે.

નવી ટ્રેન સેવા શરૂ થતાં ગુજરાત અને રાજસ્થાન વચ્ચે પ્રવાસ કરતા હજારો મુસાફરોને સીધી, ઝડપી અને આરામદાયક મુસાફરીની સુવિધા મળશે. ખાસ કરીને ઉત્તર ગુજરાત, મારવાડ અને બીકાનેર વિસ્તારના લોકો માટે આ ટ્રેન એક મહત્વપૂર્ણ પરિવહન કડી સાબિત થશે.

દૈનિક સેવા મુસાફરો માટે આશીર્વાદરૂપ

ટ્રેન નંબર 19407 સાબરમતી–લાલગઢ એક્સપ્રેસ 22 જૂન, 2026થી દરરોજ સાંજે 5:55 વાગ્યે સાબરમતીથી રવાના થશે અને બીજા દિવસે સવારે 8:10 વાગ્યે લાલગઢ પહોંચશે. જ્યારે ટ્રેન નંબર 19408 લાલગઢ–સાબરમતી એક્સપ્રેસ 23 જૂનથી દરરોજ રાત્રે 9:05 વાગ્યે લાલગઢથી પ્રસ્થાન કરીને બીજા દિવસે સવારે 11:30 વાગ્યે સાબરમતી પહોંચશે.

દૈનિક ટ્રેન સેવા હોવાથી મુસાફરોને સપ્તાહના કોઈપણ દિવસે અનુકૂળ મુસાફરી કરવાનો વિકલ્પ મળશે, જે વેપાર, શિક્ષણ, રોજગાર અને પારિવારિક પ્રવાસ માટે અત્યંત ઉપયોગી બનશે.

ઉત્તર ગુજરાત અને પશ્ચિમ રાજસ્થાનને સીધો લાભ

આ ટ્રેન મહેસાણા, પાટણ, ભીલડી, ધાનેરા, રાણીવાડા, મારવાડ ભીનમાલ, મોદરન, જાલોર, મોકલસર, સમદડી, લૂણી, જોધપુર, ગોટન, મેડતા રોડ, નાગૌર, નોખા અને બીકાનેર જેવા મહત્વપૂર્ણ સ્ટેશનો પર રોકાશે.

આ માર્ગ ઉત્તર ગુજરાત અને પશ્ચિમ રાજસ્થાનના અનેક શહેરો અને તાલુકાઓને સીધા જોડશે. લાંબા સમયથી આ વિસ્તારમાં રહેતા મુસાફરો વધુ સારી રેલ સુવિધાની માંગ કરી રહ્યા હતા, જે હવે પૂર્ણ થઈ રહી છે.

વેપાર અને ઉદ્યોગને મળશે પ્રોત્સાહન

અમદાવાદ દેશના અગ્રણી ઔદ્યોગિક અને વેપારી કેન્દ્રોમાંનું એક છે, જ્યારે બીકાનેર અને જોધપુર વિસ્તાર કૃષિ, પશુપાલન, હેન્ડીક્રાફ્ટ અને પરંપરાગત વેપાર માટે જાણીતા છે. નવી ટ્રેન શરૂ થતાં બંને રાજ્યો વચ્ચે વેપારિક અવરજવર વધુ સરળ બનશે.

નાના વેપારીઓ, ઉદ્યોગકારો અને વ્યાવસાયિકોને નવી તકો મળશે, જેના કારણે પ્રાદેશિક અર્થતંત્રને પણ વેગ મળશે.

પ્રવાસન ક્ષેત્રને મળશે નવી ઊંચાઈ

ગુજરાત અને રાજસ્થાન બંને રાજ્યો સાંસ્કૃતિક અને ઐતિહાસિક વારસાથી સમૃદ્ધ છે. બીકાનેરનું જૂનાગઢ કિલ્લો, કરણી માતા મંદિર, જોધપુરનો મેહરાનગઢ કિલ્લો અને રાજસ્થાનના અન્ય પ્રવાસન સ્થળો સુધી પહોંચવું હવે વધુ સરળ બનશે.

તે જ રીતે રાજસ્થાનના પ્રવાસીઓ અમદાવાદ, ગાંધીનગર, પાટણ અને ગુજરાતના અન્ય મહત્વપૂર્ણ સ્થળોની મુલાકાત સરળતાથી લઈ શકશે. આથી બંને રાજ્યોના પ્રવાસન ઉદ્યોગને નોંધપાત્ર લાભ થવાની શક્યતા છે.

તમામ વર્ગના મુસાફરો માટે સુવિધા

ભારતીય રેલવેએ આ ટ્રેનમાં દરેક વર્ગના મુસાફરોને ધ્યાનમાં રાખીને વિવિધ પ્રકારના કોચ ઉપલબ્ધ કરાવ્યા છે. ટ્રેનમાં એસી ફર્સ્ટ ક્લાસ (AC-1), એસી 2-ટિયર, એસી 3-ટિયર, સ્લીપર ક્લાસ અને સામાન્ય શ્રેણીના કોચ સામેલ રહેશે.

આથી આરામદાયક મુસાફરી ઇચ્છતા મુસાફરો તેમજ સામાન્ય વર્ગના મુસાફરો બંનેને પોતાની જરૂરિયાત અનુસાર મુસાફરીની સુવિધા મળશે.

20 જૂનથી શરૂ થશે આરક્ષણ

રેલવે પ્રશાસન દ્વારા જાહેર કરવામાં આવ્યું છે કે ટ્રેન નંબર 19407 માટેનું આરક્ષણ 20 જૂન, 2026થી તમામ પીઆરએસ કાઉન્ટરો તેમજ આઈઆરસીટીસીની વેબસાઇટ પર શરૂ કરવામાં આવશે. મુસાફરોને સમયસર ટિકિટ બુક કરાવવાની અપીલ કરવામાં આવી છે.

ગુજરાતમાં રેલ વિકાસનું વધુ એક મહત્વપૂર્ણ પગલું

સાબરમતી–લાલગઢ એક્સપ્રેસની શરૂઆત માત્ર નવી ટ્રેન સેવા નથી, પરંતુ ગુજરાત અને રાજસ્થાન વચ્ચેના સામાજિક, સાંસ્કૃતિક અને આર્થિક સંબંધોને વધુ મજબૂત બનાવતું એક મહત્વપૂર્ણ પગલું છે. ભારતીય રેલવે દ્વારા સતત વિસ્તરતી મુસાફર સુવિધાઓ અને નવી કનેક્ટિવિટી યોજનાઓ દેશના સર્વાંગી વિકાસમાં મહત્વની ભૂમિકા ભજવી રહી છે.

આ નવી દૈનિક ટ્રેન સેવા બંને રાજ્યોના લાખો મુસાફરો માટે આરામદાયક, સુરક્ષિત અને વિશ્વસનીય મુસાફરીનો નવો વિકલ્પ બની રહેશે.

साबरमती-लालगढ़ एक्सप्रेस से गुजरात और राजस्थान के बीच बढ़ेगी कनेक्टिविटी 21 जून को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव करेंगे शुभारंभ, यात्रियों को मिलेगा सीधा और सुविधाजनक रेल संपर्क

रिपोर्ट: गुजरात प्रवासी न्यूज़, अहमदाबाद ब्यूरो

अहमदाबाद। भारतीय रेल द्वारा यात्रियों की सुविधा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए साबरमती (अहमदाबाद) और लालगढ़ (बीकानेर) के बीच नई दैनिक एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू की जा रही है। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव 21 जून 2026 को बीकानेर से इस नई रेल सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह ट्रेन गुजरात और राजस्थान के लाखों यात्रियों के लिए एक बड़ी सौगात मानी जा रही है।

नई रेल सेवा शुरू होने से अहमदाबाद, उत्तर गुजरात, मारवाड़, जोधपुर और बीकानेर क्षेत्र के यात्रियों को सीधा और सुविधाजनक रेल संपर्क उपलब्ध होगा। लंबे समय से इस मार्ग पर बेहतर रेल सुविधा की मांग की जा रही थी, जिसे अब भारतीय रेल ने पूरा किया है।

यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ

वर्तमान में अहमदाबाद और बीकानेर क्षेत्र के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को कई बार ट्रेन बदलनी पड़ती थी या सीमित ट्रेनों पर निर्भर रहना पड़ता था। नई साबरमती-लालगढ़ एक्सप्रेस शुरू होने से यात्रियों को सीधी यात्रा का विकल्प मिलेगा। इससे समय की बचत होगी और यात्रा अधिक आरामदायक बनेगी।

यह ट्रेन विशेष रूप से व्यापारियों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, पर्यटकों तथा धार्मिक यात्रियों के लिए लाभदायक साबित होगी। राजस्थान और गुजरात के बीच व्यापारिक गतिविधियां काफी व्यापक हैं। ऐसे में यह नई ट्रेन आर्थिक और सामाजिक संबंधों को और मजबूत करेगी।

ट्रेन का समय और संचालन

रेलवे द्वारा जारी जानकारी के अनुसार ट्रेन संख्या 19407 साबरमती-लालगढ़ एक्सप्रेस 22 जून 2026 से प्रतिदिन संचालित होगी। यह ट्रेन शाम 5:55 बजे साबरमती स्टेशन से रवाना होकर अगले दिन सुबह 8:10 बजे लालगढ़ पहुंचेगी।

वापसी दिशा में ट्रेन संख्या 19408 लालगढ़-साबरमती एक्सप्रेस 23 जून 2026 से प्रतिदिन रात 9:05 बजे लालगढ़ से प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 11:30 बजे साबरमती पहुंचेगी।

दैनिक संचालन होने के कारण यात्रियों को सप्ताह के किसी भी दिन यात्रा की सुविधा मिलेगी, जिससे इस मार्ग पर रेल यातायात को नई गति मिलेगी।

उत्तर गुजरात और पश्चिमी राजस्थान को मिलेगा फायदा

यह ट्रेन उत्तर गुजरात और पश्चिमी राजस्थान के अनेक महत्वपूर्ण शहरों और कस्बों को जोड़ते हुए संचालित होगी। मार्ग में महेसाणा, पाटन, भीलड़ी, धानेरा, रानीवाड़ा, मारवाड़ भीनमाल, मोदरन, जालोर, मोकलसर, समदड़ी, लूणी, जोधपुर, गोटन, मेड़ता रोड, नागौर, नोखा और बीकानेर जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं।

इन स्टेशनों पर ठहराव मिलने से स्थानीय यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। विशेष रूप से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

पर्यटन को मिलेगा नया प्रोत्साहन

राजस्थान अपनी ऐतिहासिक धरोहर, किलों, महलों और धार्मिक स्थलों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। वहीं गुजरात उद्योग, व्यापार, संस्कृति और धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। नई रेल सेवा दोनों राज्यों के पर्यटन उद्योग को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

बीकानेर का जूनागढ़ किला, करणी माता मंदिर, ऊंट महोत्सव तथा जोधपुर के मेहरानगढ़ किला जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंचना अब अधिक आसान होगा। वहीं राजस्थान के पर्यटक अहमदाबाद, गांधीनगर और गुजरात के अन्य प्रमुख स्थलों तक सुविधाजनक रूप से पहुंच सकेंगे।

सभी वर्गों के यात्रियों के लिए विशेष सुविधा

रेलवे ने इस ट्रेन में यात्रियों की विभिन्न आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कई श्रेणियों के कोच शामिल किए हैं। ट्रेन में एसी प्रथम श्रेणी, एसी द्वितीय श्रेणी, एसी तृतीय श्रेणी, एसी 3-टियर इकोनॉमी, स्लीपर क्लास और सामान्य श्रेणी के डिब्बे लगाए जाएंगे।

इससे आर्थिक रूप से कमजोर यात्रियों से लेकर आरामदायक यात्रा पसंद करने वाले यात्रियों तक सभी को अपनी सुविधा के अनुसार यात्रा का विकल्प मिलेगा।

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेन केवल परिवहन सुविधा नहीं बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास का भी माध्यम बनेगी। गुजरात और राजस्थान के बीच कृषि उत्पाद, कपड़ा उद्योग, हस्तशिल्प, पशुपालन और व्यापारिक गतिविधियों का बड़ा नेटवर्क है। बेहतर रेल संपर्क से माल और लोगों की आवाजाही आसान होगी, जिसका सीधा लाभ स्थानीय व्यवसायों को मिलेगा।

इसके अतिरिक्त रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर होगी। छोटे शहरों और कस्बों के लोगों को बड़े शहरों से जुड़ने का बेहतर अवसर मिलेगा।

20 जून से शुरू होगी टिकट बुकिंग

रेलवे प्रशासन ने बताया है कि ट्रेन संख्या 19407 साबरमती-लालगढ़ एक्सप्रेस की आरक्षण सुविधा 20 जून 2026 से सभी पीआरएस काउंटरों और आईआरसीटीसी के माध्यम से उपलब्ध होगी। यात्रियों को अग्रिम आरक्षण कराने की सलाह दी गई है ताकि वे इस नई सेवा का लाभ उठा सकें।

विकास और कनेक्टिविटी की नई दिशा

साबरमती-लालगढ़ एक्सप्रेस का शुभारंभ भारतीय रेल की उस सोच को दर्शाता है जिसमें यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक रेल सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह नई ट्रेन गुजरात और राजस्थान के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक, पर्यटन और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगी।

निश्चित रूप से यह नई रेल सेवा दोनों राज्यों के लाखों यात्रियों के लिए सुविधाजनक, किफायती और भरोसेमंद यात्रा का नया माध्यम साबित होगी तथा क्षेत्रीय विकास की गति को और तेज करेगी।

હરિત વિકાસનું પ્રતીક બન્યું વટવા ઇલેક્ટ્રિક લોકો શેડ : પશ્ચિમ રેલવેને મળ્યું GreenCo GOLD Ratingનું ગૌરવ

રિપોર્ટ: ગુજરાત પ્રવાસી ન્યૂઝ, અમદાવાદ બ્યુરો

અમદાવાદ: પર્યાવરણ સંરક્ષણ અને ટકાઉ વિકાસ આજના સમયમાં વિશ્વ માટે સૌથી મોટો પડકાર બની રહ્યા છે. આવા સમયમાં પશ્ચિમ રેલવેના અમદાવાદ મંડળ હેઠળ આવેલું વટવા ઇલેક્ટ્રિક લોકો શેડ સમગ્ર ભારતીય રેલવે માટે પ્રેરણારૂપ ઉદાહરણ બનીને સામે આવ્યું છે. કન્ફેડરેશન ઓફ ઇન્ડિયન ઇન્ડસ્ટ્રી (CII)ના ગ્રીન બિઝનેસ સેન્ટર દ્વારા વટવા ઇલેક્ટ્રિક લોકો શેડને પ્રતિષ્ઠિત GreenCo GOLD Rating એનાયત કરવામાં આવ્યો છે. આ સિદ્ધિ માત્ર એક એવોર્ડ નથી, પરંતુ પર્યાવરણ પ્રત્યેની જવાબદારી, નવીનતા અને સતત વિકાસ પ્રત્યેની પ્રતિબદ્ધતાનો જીવંત પુરાવો છે.

પશ્ચિમ રેલવેના ઇતિહાસમાં પ્રથમ વખત કોઈ ઇલેક્ટ્રિક લોકો શેડને આ પ્રતિષ્ઠિત સન્માન મળ્યું છે. 18 જૂન, 2026ના રોજ નવી દિલ્હીના ભારત મંડપમ ખાતે યોજાયેલા 15મા GreenCo Summit દરમિયાન આ એવોર્ડ વટવા શેડના વરિષ્ઠ મંડળ મિકેનિકલ એન્જિનિયર શ્રી અશોક કુમારને અર્પણ કરવામાં આવ્યો હતો.

ડીઝલથી ઇલેક્ટ્રિક તરફનું ઐતિહાસિક પરિવર્તન

વટવા ઇલેક્ટ્રિક લોકો શેડે ડીઝલ આધારિત કામગીરીને સંપૂર્ણપણે બંધ કરીને ઇલેક્ટ્રિક ટ્રેક્શન અપનાવ્યું છે. એક સમય એવો હતો જ્યારે લાખો લિટર ડીઝલનો ઉપયોગ થતો હતો, પરંતુ આજે આ શેડે વર્ષ 2022-23 દરમિયાન 1.88 કરોડ લિટરથી વધુ ડીઝલનો વપરાશ શૂન્ય સુધી લાવી દીધો છે. પરિણામે કાર્બન ઉત્સર્જનમાં નોંધપાત્ર ઘટાડો થયો છે અને પર્યાવરણને મોટી રાહત મળી છે.

આ પરિવર્તન માત્ર ઊર્જા બચત પૂરતું સીમિત નથી, પરંતુ સ્વચ્છ અને હરિત પરિવહન વ્યવસ્થાની દિશામાં એક મોટું પગલું છે. ભારતીય રેલવેના નેટ ઝીરો કાર્બન ઉત્સર્જનના લક્ષ્યને સાકાર કરવામાં વટવા શેડનું યોગદાન અત્યંત મહત્વપૂર્ણ બની રહ્યું છે.

ઊર્જા બચત માટે આધુનિક ટેક્નોલોજીનો ઉપયોગ

વટવા શેડમાં ઊર્જા બચાવવા માટે અનેક આધુનિક તકનીકો અપનાવવામાં આવી છે. એસેમ્બલી બેમાં કુદરતી પ્રકાશનો મહત્તમ ઉપયોગ થાય તે માટે ડેલાઇટ હાર્વેસ્ટિંગ સિસ્ટમ સ્થાપિત કરવામાં આવી છે. પરંપરાગત વીજળી વધુ વાપરતા પંખાઓના સ્થાને 5-સ્ટાર રેટેડ BLDC પંખા લગાવવામાં આવ્યા છે.

તે ઉપરાંત LED લાઇટિંગ, ઓક્યુપન્સી સેન્સર અને એસ્ટ્રોનોમિકલ ટાઈમર જેવી વ્યવસ્થાઓથી વીજળીનો બિનજરૂરી વપરાશ અટકાવવામાં આવ્યો છે. પરિણામે ઊર્જા કાર્યક્ષમતામાં નોંધપાત્ર વધારો થયો છે.

પાણીના દરેક ટીપાની બચત

જળ સંરક્ષણના ક્ષેત્રમાં પણ વટવા શેડે અનોખી પહેલ કરી છે. વરસાદી પાણીના સંચય અને ભૂગર્ભ જળ પુનર્ભરણની વ્યવસ્થાઓ દ્વારા દર વર્ષે લાખો લિટર પાણીનું સંરક્ષણ કરવામાં આવી રહ્યું છે.

લોકોમોટિવની વિન્ડશીલ્ડ વોશર સિસ્ટમમાં સુધારા, પાણી વગર ચાલતા યુરિનલ અને ગંદા પાણીના પુનઃઉપયોગ જેવી નવીન પહેલોએ પાણીના ઉપયોગમાં નોંધપાત્ર ઘટાડો કર્યો છે. આ પ્રયાસો પાણીની વધતી જતી અછત સામે એક અસરકારક ઉકેલ બની રહ્યા છે.

સૂર્ય ઊર્જાથી હરિત ભવિષ્ય

નવીનીકરણીય ઊર્જાને પ્રોત્સાહન આપવા માટે અમદાવાદ મંડળમાં 1863 kWp ક્ષમતાના સોલાર પ્લાન્ટ સ્થાપિત કરવામાં આવ્યા છે. આ પ્લાન્ટો દર વર્ષે લાખો યુનિટ સ્વચ્છ વીજળીનું ઉત્પાદન કરે છે. વટવા શેડ માટે વિશેષ રૂફટોપ સોલાર પ્રોજેક્ટ પણ પ્રસ્તાવિત છે, જે ભવિષ્યમાં ઊર્જા સ્વાવલંબન તરફ મહત્વપૂર્ણ પગલું સાબિત થશે.

ઝીરો વેસ્ટ તરફનો સફળ પ્રયાસ

કચરા વ્યવસ્થાપનના ક્ષેત્રમાં વટવા શેડે “Zero Waste to Landfill” અભિગમ અપનાવ્યો છે. કચરાનું વિભાજન, પુનઃચક્રણ અને પર્યાવરણને અનુકૂળ નિકાલ દ્વારા કચરાને ઉપયોગી સંસાધનમાં પરિવર્તિત કરવામાં આવી રહ્યો છે.

સ્પેર પાર્ટ્સના પુનઃઉપયોગ અને સંસાધનોના યોગ્ય સંચાલનથી દર વર્ષે લાખો રૂપિયાની બચત પણ થઈ રહી છે. આ મોડલ અન્ય ઔદ્યોગિક એકમો માટે પણ માર્ગદર્શક બની શકે છે.

હરિત સપ્લાય ચેઇન અને નવીનતા

વટવા શેડે ગ્રીન પ્રમાણિત સપ્લાયરો પાસેથી ખરીદી, સિંગલ યુઝ પ્લાસ્ટિક પર પ્રતિબંધ અને પર્યાવરણમૈત્રી પેકેજિંગ જેવી નીતિઓ અપનાવી છે. અહીં વિકસાવવામાં આવેલી કેટલીક તકનીકી નવીનતાઓને રેલવેના સંશોધન સંગઠન RDSO દ્વારા પણ સ્વીકારવામાં આવી છે.

રેલવે બોર્ડની ઇલેક્ટ્રિક લોકોમોટિવ કેબિન અપગ્રેડેશન સ્પર્ધામાં પ્રથમ સ્થાન પ્રાપ્ત કરવું પણ વટવા શેડની નવીનતાની ક્ષમતાનો પુરાવો છે.

સમગ્ર દેશ માટે પ્રેરણાસ્ત્રોત

GreenCo GOLD Rating માત્ર એક સન્માન નથી, પરંતુ તે સંદેશ આપે છે કે વિકાસ અને પર્યાવરણ સંરક્ષણ એકબીજાના વિરોધી નથી. યોગ્ય આયોજન, આધુનિક ટેક્નોલોજી અને મજબૂત ઇચ્છાશક્તિ દ્વારા બંનેને સાથે લઈને આગળ વધી શકાય છે.

વટવા ઇલેક્ટ્રિક લોકો શેડની આ સિદ્ધિ પશ્ચિમ રેલવે માટે ગૌરવની વાત છે, સાથે જ સમગ્ર ભારતીય રેલવે અને અન્ય સરકારી-ખાનગી સંસ્થાઓ માટે પણ પ્રેરણારૂપ ઉદાહરણ છે. ભારત જ્યારે હરિત અને ટકાઉ ભવિષ્ય તરફ આગળ વધી રહ્યું છે ત્યારે વટવા શેડ જેવી સંસ્થાઓ આ પરિવર્તનના સાચા વાહક બની રહી છે.

(વિશેષ લેખ)
ગુજરાત પ્રવાસી ન્યૂઝ – અમદાવાદ બ્યુરો

पश्चिम रेलवे में पहली बार वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को मिला प्रतिष्ठित CII GreenCo GOLD रेटिंग सम्मान

रिपोर्ट: गुजरात प्रवासी न्यूज़, अहमदाबाद ब्यूरो

अहमदाबाद। पश्चिम रेलवे के इतिहास में पहली बार अहमदाबाद मंडल के अंतर्गत आने वाले वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड ने पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और सतत विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करते हुए प्रतिष्ठित CII GreenCo GOLD Rating प्राप्त की है। यह सम्मान कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के ग्रीन बिजनेस सेंटर (GBC) द्वारा नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 18 जून 2026 को आयोजित 15वें GreenCo Summit 2026 के दौरान प्रदान किया गया। यह उपलब्धि न केवल वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड बल्कि पूरे पश्चिम रेलवे और भारतीय रेल के लिए गर्व का विषय है।

यह प्रतिष्ठित सम्मान वरिष्ठ मंडल मैकेनिकल इंजीनियर (वटवा) श्री अशोक कुमार ने प्राप्त किया। GreenCo GOLD Rating प्राप्त करने वाला वटवा शेड पश्चिम रेलवे का पहला इलेक्ट्रिक लोको शेड बन गया है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रेल केवल यात्री एवं माल परिवहन सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है।

डीआरएम ने जताया गर्व

अहमदाबाद मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री वेद प्रकाश ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को प्राप्त GreenCo GOLD Rating पूरे अहमदाबाद मंडल और पश्चिम रेलवे के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान अधिकारियों एवं कर्मचारियों की वर्षों की मेहनत, नवाचार, संसाधनों के कुशल उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि भारतीय रेल वर्ष 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है और वटवा शेड की यह उपलब्धि उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सफलता देशभर की अन्य रेलवे इकाइयों को भी हरित तकनीकों को अपनाने और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

क्या है GreenCo Rating?

GreenCo Rating भारत की पहली समग्र पर्यावरणीय मूल्यांकन प्रणाली है, जिसे CII-Green Business Centre द्वारा विकसित किया गया है। यह किसी संस्थान के पर्यावरणीय प्रदर्शन, संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास के प्रयासों का मूल्यांकन करती है।

इस मूल्यांकन के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण, हरित अवसंरचना, हरित आपूर्ति श्रृंखला, पर्यावरणीय नवाचार तथा पारिस्थितिकी संरक्षण जैसे विभिन्न मानकों को शामिल किया जाता है। GOLD Rating इस प्रणाली के सर्वोच्च सम्मानों में से एक मानी जाती है।

डीजल से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर ऐतिहासिक बदलाव

वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डीजल आधारित परिचालन को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। वर्ष 2022-23 में जहां 1.88 करोड़ लीटर से अधिक हाई स्पीड डीजल (HSD) की खपत होती थी, वहीं अब यह खपत पूरी तरह शून्य हो चुकी है।

इस बदलाव से Scope-1 ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 100 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इससे न केवल प्रदूषण कम हुआ है, बल्कि रेलवे की ऊर्जा लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

ऊर्जा दक्षता के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग

वटवा शेड में ऊर्जा संरक्षण के लिए कई अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाया गया है। कार्यशालाओं और असेंबली बे में प्राकृतिक प्रकाश के अधिकतम उपयोग हेतु लॉन्ग-ट्यूब डेलाइट हार्वेस्टिंग (Brillantor) प्रणाली स्थापित की गई है।

इसके अतिरिक्त पारंपरिक बिजली खपत करने वाले उपकरणों के स्थान पर 5-स्टार रेटेड BLDC पंखे लगाए गए हैं। CFL और हैलोजन लाइटों को हटाकर LED लाइटें स्थापित की गई हैं। ऊर्जा की बचत के लिए ऑक्यूपेंसी सेंसर और एस्ट्रोनॉमिकल टाइमर भी लगाए गए हैं, जिससे अनावश्यक बिजली खपत को रोका जा सके।

जल संरक्षण में भी मिसाल

वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड ने जल संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण प्रणाली के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 20.5 लाख लीटर जल पुनर्भरण की क्षमता विकसित की गई है।

लोकोमोटिव विंडशील्ड वॉशर सिस्टम में तकनीकी सुधार किए गए हैं, जिससे कम पानी में बेहतर सफाई संभव हो सकी है। साथ ही जलरहित यूरिनल की व्यवस्था कर हजारों लीटर पानी की बचत सुनिश्चित की गई है। अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण से ताजे पानी की खपत में भी लगातार कमी आई है।

सौर ऊर्जा उत्पादन में बढ़ाया योगदान

अहमदाबाद मंडल ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। मंडल में लगभग 1863 किलोवाट पीक क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनसे प्रतिवर्ष करीब 24.22 लाख यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन हो रहा है।

वटवा शेड के लिए अलग से रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की योजना भी तैयार की गई है। इससे रेलवे के कार्बन फुटप्रिंट को और कम करने में मदद मिलेगी।

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगातार कमी

वटवा शेड ने Scope-1, Scope-2 और Scope-3 श्रेणियों में कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता में लगातार वर्ष-दर-वर्ष कमी दर्ज की है। परिसर में 800 से अधिक वृक्षों का संरक्षण और हरित क्षेत्र का विस्तार भी कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पहलें भारतीय रेल को दुनिया की सबसे पर्यावरण-अनुकूल रेल प्रणालियों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ की दिशा में सफलता

वटवा शेड ने ‘Zero Waste to Landfill’ अवधारणा को अपनाकर अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। कचरे का स्रोत स्तर पर पृथक्करण, अधिकृत एजेंसियों द्वारा पुनर्चक्रण तथा पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था लागू की गई है।

शेड में ISO 14001 और ISO 50001 मानकों के अनुरूप पर्यावरण एवं ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली लागू है। पुर्जों के पुनः उपयोग, सामग्री संरक्षण और वार्षिक औसत खपत की नियमित समीक्षा के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 38 लाख रुपये की बचत की जा रही है।

नवाचारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड केवल पर्यावरणीय क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचारों में भी अग्रणी रहा है। शेड द्वारा विकसित एक तकनीकी संशोधन को रेलवे डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) ने स्वीकार कर पूरे भारतीय रेल नेटवर्क में अपनाया है।

इसके अलावा रेलवे बोर्ड द्वारा आयोजित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव केबिन अपग्रेडेशन प्रतियोगिता में भी वटवा शेड को संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। सुरक्षा, कार्यक्षमता और उत्पादकता बढ़ाने वाले कई नवाचार यहां विकसित किए गए हैं।

भारतीय रेल के हरित भविष्य की मजबूत नींव

विशेषज्ञों का मानना है कि वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को प्राप्त GreenCo GOLD Rating केवल एक सम्मान नहीं बल्कि भारतीय रेल के हरित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सफलता दिखाती है कि आधुनिक तकनीक, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और परिचालन उत्कृष्टता एक साथ चलते हुए सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकती हैं।

वटवा शेड के अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों से मिली यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में भारतीय रेल को वर्ष 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी और देशभर की रेलवे इकाइयों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।