Home प्रदेश वैश्विक महामारी और मानसिक रोगों से बचाव की “रामबाण औषधि” है योग : डॉ. शवनम कुमारी

वैश्विक महामारी और मानसिक रोगों से बचाव की “रामबाण औषधि” है योग : डॉ. शवनम कुमारी

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वैश्विक महामारी और मानसिक रोगों से बचाव की “रामबाण औषधि” है योग : डॉ. शवनम कुमारी

पंकज कुमार गुप्ता

होडल (पलवल), हरियाणा वर्तमान समय में वैश्विक महामारी और मानसिक रोगों से जूझती मानवता के लिए योग एक रामबाण औषधि के रूप में सामने आया है। यह विचार एम. के. एम. कॉलेज ऑफ एजुकेशन, होडल (पलवल) की शिक्षा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शवनम कुमारी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि योग हमारे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने का एक सरल, सुलभ और निःशुल्क साधन है।

डॉ. शवनम कुमारी ने बताया कि योग दिवस की शुरुआत 2015 में हुई थी, जब 21 जून को विश्व भर में पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में 2014 में प्रस्तुत प्रस्ताव के बाद संभव हुआ। इस वर्ष 2025 की अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “योगा फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ” (Yoga for One Earth, One Health) है, जो पूरी दुनिया को एक स्वस्थ और टिकाऊ भविष्य की दिशा में प्रेरित करती है।

उन्होंने कहा कि ‘योग’ शब्द संस्कृत के ‘युज’ धातु से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है जोड़ना। योग आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का कार्य करता है और चित्त की चंचल वृत्तियों को नियंत्रित करता है। आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में योग और ध्यान दोनों ही मानसिक रोगों से बचने का अचूक उपाय हैं।

डॉ. शवनम कुमारी ने जोर देकर कहा कि जैसे शरीर के लिए भोजन आवश्यक है, वैसे ही मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन के लिए योग और ध्यान आवश्यक हैं। अरस्तू के कथन “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है” को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि योग से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक शुद्धता और सकारात्मक विचारधारा का भी विकास होता है।

उन्होंने कहा कि योग और ध्यान जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने, समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने, और वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को साकार करने में सहायक हैं। योग मन, मस्तिष्क और आत्मा की एकता को मजबूत करता है और व्यक्ति को एक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

निष्कर्ष स्वरूप, डॉ. शवनम कुमारी ने सभी से आह्वान किया कि वे योग और ध्यान को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं ताकि शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ, तनावमुक्त और सकारात्मक जीवन जिया जा सके। उन्होंने कहा – “योगः निरोगमः साधनमः” अर्थात योग ही निरोगी जीवन का साधन है।

रिपोर्ट – पंकज कुमार गुप्ता जालौन/अहमदाबाद 

गुजरात प्रवासी न्यूज अहमदाबाद

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