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मथुरा के ऐतिहासिक तोशाखाने से हजारों करोड़ के दान और बहुमूल्य आभूषण गायब होने के आरोप, संतों ने दी आंदोलन की चेतावनी

मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में स्थित एक प्राचीन मंदिर के ऐतिहासिक तोशाखाने (खजाने) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के प्रमुख एवं मामले के मुख्य शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में हलचल मचा दी है। आरोप है कि मंदिर के तोशाखाने में वर्षों से सुरक्षित रखे गए हजारों करोड़ रुपये मूल्य के दान, सोने-चांदी के आभूषण, हीरे-जवाहरात तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुएं रहस्यमय तरीके से गायब हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में कई दशकों बाद जब मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक तोशाखाने को खोला गया तो वहां का दृश्य देखकर लोग स्तब्ध रह गए। बताया जा रहा है कि खजाने में रखे कई संदूक खाली मिले तथा जिन डिब्बों में बहुमूल्य आभूषण और रत्न रखे जाने का दावा किया जाता था, उनमें भी कोई सामग्री नहीं मिली। इतना ही नहीं, मंदिर की चल एवं अचल संपत्तियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी गायब पाए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन से जुड़े संत फलाहारी बाबा ने इस पूरे मामले को हिंदू समाज की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को अर्पित किए गए दान का सही हिसाब सामने आना चाहिए। उनका आरोप है कि वर्षों तक उचित निगरानी और सरकारी सील की व्यवस्था न होने का लाभ उठाकर कुछ लोगों ने मंदिर की अमूल्य संपदा को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

संत समाज ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन शुरू किया जाएगा। संतों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर वे आमरण अनशन और भूख हड़ताल का रास्ता अपनाने के लिए भी तैयार हैं। उनका आरोप है कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का दुरुपयोग कर कुछ लोगों ने भारी आर्थिक लाभ अर्जित किया है।

इस विवाद के बीच मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिरों में आने वाले दान, आभूषणों और संपत्तियों का नियमित ऑडिट कराया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके। श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिरों की संपत्तियां समाज की आस्था से जुड़ी होती हैं और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीर है।

वहीं, विभिन्न सामाजिक संगठनों और संतों ने सरकार से मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराई जाए। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए और मंदिर की संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए नई व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

फिलहाल इस पूरे मामले में संबंधित प्रशासन या जांच एजेंसियों की ओर से कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में सभी आरोप जांच के दायरे में हैं। हालांकि, इस प्रकरण ने मथुरा सहित पूरे देश में मंदिर प्रबंधन, दान व्यवस्था और धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

अस्वीकरण (Disclaimer):
इस समाचार में उल्लिखित तथ्य विभिन्न व्यक्तियों, संतों एवं शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों, दावों तथा उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। संबंधित मामले की जांच एवं सत्यापन सक्षम प्रशासनिक और जांच एजेंसियों द्वारा किया जाना शेष है। जब तक किसी न्यायालय, जांच एजेंसी अथवा प्रशासनिक प्राधिकरण द्वारा आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की जाती, तब तक इन आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। समाचार का उद्देश्य केवल उपलब्ध जानकारी को जनहित में प्रस्तुत करना है।

रिपोर्ट: राहुल शर्मा
चैनल हेड, गुजरात प्रवासी न्यूज़ मथुरा

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