Homeगुजरात प्रवासी न्यूज़ अहमदाबादअहमदाबाद कांग्रेस में विरोध पक्ष नेता को लेकर मंथन तेज, दलित प्रतिनिधित्व...

अहमदाबाद कांग्रेस में विरोध पक्ष नेता को लेकर मंथन तेज, दलित प्रतिनिधित्व पर बढ़ी चर्चा

( अश्विन अग्रवाल) संवाददाता
अहमदाबाद। अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) में नई बोर्ड संरचना के गठन के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में पिछड़ा वर्ग से महापौर और पाटीदार समुदाय से स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन का चयन किया है। हालांकि शहर की राजनीति पर नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निगम प्रशासन में प्रभावशाली निर्णय लेने की शक्ति अब भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हाथों में केंद्रित है।
पिछले दो दशकों से अहमदाबाद नगर निगम पर भाजपा का नियंत्रण है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार निगम की सत्ता संरचना में जैन और पाटीदार समुदायों का प्रभाव लंबे समय से देखा जाता रहा है। वहीं शहर की आबादी में अनुसूचित जाति और मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी उल्लेखनीय होने के बावजूद उन्हें निगम की शीर्ष प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों में प्रतिनिधित्व न के बराबर मिला है।
दूसरी ओर कांग्रेस 32 पार्षदों के साथ निगम में प्रमुख विपक्षी दल है। वर्ष 2021 में कांग्रेस के 24 पार्षद थे और उस समय पार्टी ने शाहज़ाद खान पठान को विरोध पक्ष का नेता नियुक्त किया था। वर्ष 2026 के चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा का मजबूत गढ़ माने जाने वाले खाड़िया वार्ड में जीत दर्ज कर राजनीतिक हलकों का ध्यान आकर्षित किया। पार्टी का वोट प्रतिशत भी बढ़ा, लेकिन वह सत्ता परिवर्तन के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ।
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि इस चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का मतदान प्रतिशत सामान्य से 10 से 15 प्रतिशत अधिक रहा, जबकि अनुसूचित जाति समुदाय का समर्थन कांग्रेस को मिला, लेकिन वह उस स्तर तक नहीं पहुंच सका जिससे निगम के समग्र परिणामों पर निर्णायक प्रभाव पड़ता।

25 जून की बोर्ड बैठक से पहले हो सकता है फैसला

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अहमदाबाद नगर निगम में इस बार दलित समुदाय से विरोध पक्ष नेता नियुक्त करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। निगम बोर्ड की बैठक 25 जून को प्रस्तावित है और माना जा रहा है कि उससे पहले पार्टी इस पद पर निर्णय ले सकती है।
इस संबंध में कांग्रेस शहर अध्यक्ष सोनलबेन पटेल ने बताया, “पार्टी जल्द ही निर्णय लेगी। अभी विरोध पक्ष नेता के चयन को लेकर कोई अंतिम चर्चा नहीं हुई है। विधायक शैलेश परमार का गुट शाहज़ाद खान को दोबारा अवसर देने के पक्ष में हैं, जबकि दूसरे नेताओं का मानना है कि प्रदेश नेतृत्व अपने विवेक से निर्णय करे।”
कई नामों पर चर्चा
पार्टी सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ पार्षद नीरव बक्षी का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल था। लेकिन सोशल मीडिया पर बक्शी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस्राइल की प्रशंसा के चलते मुस्लिमों में विरोध देखा जा रहा है

बक्षी का एक स्क्रीन शॉट तेजी से वायरल चल रहा है पोस्ट में इस्राइल सेना द्वारा गाज़ा में बमबारी का वीडियो है वीडियो पर बक्षी टिप्पणी करते लिखते हैं “मोदी जी हमें भी देश की सुरक्षा के लिए इस्राइल की तरह वामपंथी पत्रकारों को अरेस्ट कर देश द्रोह का मुकदमा चलाकर फांसी पर लटकाना होगा
बहुत इज्ज़त दे दी मानव अधिकार वालों और प्रेस फ्रीडम को
राष्ट्र प्रथम”
इस वायरल स्क्रीन शॉट के चलते बक्षी को मुस्लिमों का विरोध झेलना पड़ रहा है और मुस्लिम नेताओं ने बक्षी की सिफारिश से हाथ पीछे खींच लिए हैं
हालांकि अंतिम निर्णय प्रदेश नेतृत्व के स्तर पर लिया जाना है। दरियापुर, खाड़िया और जमालपुर क्षेत्र के कांग्रेस पार्षदों ने भी चयन का अधिकार प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा और राज्य नेतृत्व पर छोड़ दिया है।
सूत्रों का कहना है कि दाणीलीमडा, बहरामपुर, गोमतीपुर और रखियाल वार्ड के कई पार्षदों ने शाहज़ाद खान के नाम की सिफारिश की है। वर्तमान निगम में कांग्रेस के 18 मुस्लिम और 7 अनुसूचित जाति समुदाय से निर्वाचित पार्षद हैं।
चुनाव के बाद मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों ने मुस्लिम नेता को विरोध पक्ष का नेता बनाने की मांग उठाई थी। हालांकि अब दलित समुदाय के प्रतिनिधित्व की मांग अधिक मुखर होकर सामने आ रही है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन पर विचार कर रहा है।
दलित नेता को मिल सकता है मौका
सोनलबेन पटेल का कहना है कि, “शाहज़ाद खान को पहले अवसर मिल चुका है। कांग्रेस में सभी नेता पार्टी के चुनाव चिन्ह पर जीतकर आते हैं। अंतिम निर्णय प्रदेश नेतृत्व और वरिष्ठ पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक द्वारा लिया जाएगा।”
वहीं नीरव बक्षी ने कहा, “विरोध पक्ष नेता के चयन की प्रक्रिया चल रही है। नियुक्ति एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है। हम भी पार्टी के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।”
कांग्रेस के सात दलित पार्षदों में चार पुरुष और तीन महिला पार्षद शामिल हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि भाजपा द्वारा हितेश बारोट को महापौर बनाए जाने के बाद कांग्रेस भी संभवतः पुरुष पार्षद को विरोध पक्ष नेता की जिम्मेदारी सौंप सकती है।
दलित समुदाय से निर्वाचित पार्षदों में देवेंद्र विषनगरी दूसरे कार्यकाल के पार्षद हैं, जबकि अन्य पहली बार निगम पहुंचे हैं। वहीं मक्तमपुरा वार्ड से निर्वाचित हितेंद्र पिठड़िया का नाम भी चर्चा में है। वे कांग्रेस प्रदेश अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष हैं, प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस की कमजोर स्थिति को देखते हुए दलित-मुस्लिम सामाजिक समीकरण भविष्य में पार्टी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। ऐसे में विरोध पक्ष नेता का चयन केवल संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि आगामी चुनावों की दिशा तय करने वाला राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। अहमदाबाद में विरोध पक्ष नेता चयन में प्रदेश प्रमुख अमित चावड़ा की अहम भूमिका होगी क्यूंकि अधिकतर पार्षदों ने उन्हें विरोध पक्ष नेता चुनने का अधिकार दे दिया है|

RELATED ARTICLES

Most Popular