उरई/जिला जालौन, 14 अप्रैल: भारत के महान समाज सुधारक, विधिवेत्ता और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती आज पूरे देश में हर्षोल्लास, श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
सुबह से ही लोगों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। जगह-जगह अंबेडकर जी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा रैलियां, विचार गोष्ठियां एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें उनके जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
उरई (जिला जालौन) क्षेत्र में भी जयंती के अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अंबेडकर जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि अंबेडकर जी ने समाज में समानता, शिक्षा और अधिकारों के लिए जो संघर्ष किया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
कार्यक्रमों के दौरान विशेष रूप से युवाओं को उनके विचारों को अपनाने और शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया गया। कई स्थानों पर नि:शुल्क शिक्षा, स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता अभियान भी आयोजित किए गए, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को लाभ मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंबेडकर जी द्वारा निर्मित भारतीय संविधान ने देश को एक सशक्त लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान किया है, जो आज भी देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस अवसर पर प्रशासन द्वारा शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई, वहीं आम जनता ने भी पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ कार्यक्रमों में भाग लेकर इस महापर्व को सफल बनाया।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती केवल एक पर्व नहीं, बल्कि उनके आदर्शों—समानता, न्याय और शिक्षा—को जीवन में अपनाने का संदेश है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि दृढ़ संकल्प और संघर्ष के बल पर समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
रिपोर्ट/चैनल हेड: पंकज गुप्ता जिला: जालौन (उरई), उत्तर प्रदेश गुजरात प्रवासी न्यूज, अहमदाबाद