लखनऊ।
अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के विशेष प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रतिकुलपति श्रद्धेय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने आज इंदिरानगर सेक्टर–9 स्थित गायत्री ज्ञान मंदिर में नवीनीकृत साहित्य विस्तार पटल का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “ज्ञान जीवन का प्रकाश है और जीवन मूल्यों की सुरभि है।”
डॉ. पण्ड्या ने वंदनीया माताजी के जन्म शताब्दी वर्ष एवं अखण्ड ज्योति के शताब्दी वर्ष में सभी साधकों और कार्यकर्ताओं को उत्साह एवं श्रद्धा के साथ भागीदारी हेतु प्रेरित किया तथा युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के संदेशों को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
युगऋषि द्वार का उद्घाटन


कार्यक्रम की शुरुआत नवनिर्मित युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वार के उद्घाटन से हुई। इसके बाद मुख्य द्वार पर श्रीमती शशी गंगवार व अन्य बहनों ने आरती कर स्वागत-अर्चना की।
डॉ. पण्ड्या ने फीता काटकर साहित्य विस्तार पटल में प्रवेश किया तथा युगऋषि द्वारा रचित साहित्य विथिका एवं प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने साहित्य विस्तार केंद्र के शिलान्यास पट्ट का भी अनावरण किया।
गरिमामय स्वागत एवं सम्मान
सभागार में देवमंच को प्रणाम कर पहुँचे श्रद्धेय पण्ड्या जी का स्वागत श्रीमती निर्मला पाण्डेय ने तिलक लगाकर किया।
ट्रस्टी श्रीमती उषा सिंह, श्रीमती कमला सक्सेना, श्रीमती अर्चना निरंजन और श्रीमती सावित्री शर्मा ने पुष्पगुच्छ भेंट किए।
श्री वी.के. श्रीवास्तव, श्री देवेन्द्र सिंह, श्री विपिन सहाय यादव और श्री बी.पी. सविता ने माल्यार्पण किया जबकि श्री एम.के. निरंजन ने अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया।
स्थानीय पार्षद श्री मुकेश सिंह चौहान का भी डॉ. पण्ड्या ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।
प्रेरणादायक उद्बोधन
अपने उद्बोधन में डॉ. पण्ड्या ने कहा,
“ज्ञान वह प्रकाश है जो जीवन को दिशा देता है, विचारों को संस्कार देता है और जीवन मूल्यों को सुगंधित बनाता है।”
मुख्य प्रबंध ट्रस्टी श्री उमानन्द शर्मा ने स्वागत भाषण देकर कार्यक्रम का संचालन किया।
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