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प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर के जरिए रिश्तों में समझ और समानता

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प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर के जरिए रिश्तों में समझ और समानता

रिपोर्ट: अश्विन अग्रवाल, अहमदाबाद

भारतीय संविधान लिंग आधारित भेदभाव को नकारता है और सभी के लिए समान अधिकारों की वकालत करता है। संस्कृति से संस्कार तक के नये भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अनूठी पहल शुरू की है। शादी से पहले जीवनसाथी के साथ संवाद, समझ और जिम्मेदारियों की स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए देशभर में ‘प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर’ खोले जा रहे हैं।

देशभर में 25 सेंटर शुरू

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने अहमदाबाद प्रवास के दौरान बताया कि अब तक देश के विभिन्न राज्यों में 25 ऐसे सेंटर खोले जा चुके हैं। गुजरात के बोटाद और अहमदाबाद में दो सेंटर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य विवाह संस्था को सशक्त बनाना, वैवाहिक जीवन में पारस्परिक संवाद को बेहतर करना और प्रारंभिक विवादों को रोकना है।

रहाटकर ने कहा,“नवविवाहित जोड़ों को जीवन के महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। इन केंद्रों पर परामर्श के माध्यम से जीवनसाथी चयन, आपसी समझ, अधिकारों और जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाएगी।”

उन्होंने जोड़ा कि समाज में बढ़ते तलाक और पारिवारिक विघटन के मामलों को देखते हुए विवाह से पहले संवाद और मानसिक तैयारी को प्राथमिकता देना आवश्यक हो गया है।

पुरुष आयोग की मांग पर संतुलित रुख

पुरुषों से जुड़े भेदभाव, जेंडर कानूनों के दुरुपयोग और ‘पुरुष आयोग’ की बढ़ती मांग के सवाल पर रहाटकर ने स्पष्ट टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा,

“यह एक गंभीर विषय है और फिलहाल मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहती।”

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर की यह पहल दोनों पक्षों—पुरुष और महिला—के हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। यह कदम विवाह पूर्व संवाद के जरिए समस्याओं की संभावना को कम करने और लिंग आधारित समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रयास है। यह बयान संकेत देता है कि सरकार और आयोग इस मुद्दे को संज्ञान में ले रहे हैं, लेकिन फिलहाल संतुलित और समावेशी रुख अपना रहे हैं।

सामाजिक और कानूनी जागरूकता का प्रशिक्षण

रहाटकर ने बताया कि इन केंद्रों में युवक-युवती और उनके परिजन कानूनी, सामाजिक और मानसिक परामर्श ले सकते हैं। यहाँ यह भी सिखाया जाएगा कि विवाह केवल एक सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भरा साझेदारी का निर्णय है, जिसे सोच-समझकर लेना चाहिए। यह पहल नये भारत के उस संकल्प को मजबूत करती है, जो संस्कृति और संस्कारों के माध्यम से समाज में समानता और समझ को बढ़ावा देना चाहता है।

महिला जनसुनवाई में त्वरित कार्रवाई

अपने अहमदाबाद दौरे के दौरान रहाटकर ने महिला जनसुनवाई कार्यक्रम में भाग लिया, जहाँ पारिवारिक विवाद, साइबर अपराध और प्रशासनिक शिकायतों जैसे 50 से अधिक मामलों की सुनवाई की गई। कुछ गंभीर मामलों में उन्होंने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

गुजरात दौरा और नीतिगत चर्चाएँ

अपने दो दिवसीय गुजरात दौरे में रहाटकर ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से शिष्टाचार भेंट की और गांधीनगर, पालनपुर समेत कई जिलों में सामाजिक और नीतिगत बैठकों में भाग लिया। इन बैठकों में सामाजिक जागरूकता और नीतिगत सुधारों पर चर्चा हुई, जो नये भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

नया भारत का संकल्प: क्या यह साकार होगा?

प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर जैसी पहल न केवल वैवाहिक जीवन को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह संविधान के उस सिद्धांत को भी रेखांकित करता है, जो लिंग आधारित भेदभाव को नकारता है। यह पहल पुरुष और महिला दोनों के लिए समान अवसर और समझ को बढ़ावा देकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास है। हालांकि, ‘पुरुष आयोग’ जैसे मुद्दों पर स्पष्ट नीति की कमी और सामाजिक जटिलताएँ इस संकल्प को साकार करने में चुनौतियाँ पेश कर सकती हैं। फिर भी, यह पहल नये भारत के संस्कारों को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

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