Home प्रदेश गायत्री ज्ञान मंदिर के ज्ञान यज्ञ अभियान के अंतर्गत 456वाँ युगऋषि वाङ्मय स्थापना कार्यक्रम सम्पन्न

गायत्री ज्ञान मंदिर के ज्ञान यज्ञ अभियान के अंतर्गत 456वाँ युगऋषि वाङ्मय स्थापना कार्यक्रम सम्पन्न

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गायत्री ज्ञान मंदिर के ज्ञान यज्ञ अभियान के अंतर्गत 456वाँ युगऋषि वाङ्मय स्थापना कार्यक्रम सम्पन्न

लखनऊ | ब्यूरो : गुजरात प्रवासी न्यूज़

गायत्री ज्ञान मंदिर, इंदिरा नगर, लखनऊ द्वारा संचालित विचार क्रांति ज्ञान यज्ञ अभियान के अंतर्गत एक और प्रेरणादायी उपलब्धि दर्ज की गई। इस क्रम में बाबा कॉलेज ऑफ नर्सिंग, देवा रोड, चिनहट, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के पुस्तकालय में गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सम्पूर्ण 79 खण्डों के युगऋषि वाङ्मय की 456वीं स्थापना का गरिमामय कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर श्रीमती अनुपम सक्सेना एवं श्री अनुभव सक्सेना ने अपने सम्मानित पूर्वजों की स्मृति में अवध लॉ कॉलेज, असेनी रोड, बाराबंकी के केंद्रीय पुस्तकालय को युगऋषि वाङ्मय साहित्य भेंट किया। साथ ही संस्थान के प्रवक्ताओं, संकाय सदस्यों एवं छात्र-छात्राओं को अखण्ड ज्योति (हिंदी) मासिक पत्रिका भी प्रदान की गई, जिससे विद्यार्थियों में नैतिक,बौद्धिक एवं आध्यात्मिक चेतना का विकास हो सके। 

वाङ्मय स्थापना अभियान के मुख्य संयोजक श्री उमानंद शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा

ज्ञानदान इस धरती का श्रेष्ठ कार्य है। जब विचारों का प्रकाश पुस्तकों के माध्यम से समाज तक पहुँचता है, तब मानव निर्माण और राष्ट्र निर्माण की सशक्त नींव पड़ती है।

उन्होंने युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य के साहित्य को युगदृष्टा विचारधारा का आधार बताते हुए कहा कि यह वाङ्मय विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाला सिद्ध होगा।

कार्यक्रम में श्री वी०के० श्रीवास्तव ने युगऋषि साहित्य की सामाजिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला, जबकि संस्थान के निदेशक श्री आर०के० वाजपेई ने ऐसे ज्ञानपरक आयोजनों को शिक्षा संस्थानों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। कार्यक्रम के समापन पर संस्थान की प्रधानाचार्या डॉ० अर्चना चौहान ने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर गायत्री ज्ञान मंदिर के प्रतिनिधि श्री उमानंद शर्मा, श्री वी०के० श्रीवास्तव, श्री अनुभव सक्सेना, श्रीमती अनुपमा सक्सेना, श्रीमती कमला सक्सेना, संस्थान के निदेशक श्री आर०के० वाजपेई, प्रो० नितिन, अन्य प्रवक्तागण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का वातावरण विचार, साधना और सेवा की भावना से ओतप्रोत रहा।

    

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