Home गायत्री महायज्ञ अयोध्या में पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न

अयोध्या में पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न

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अयोध्या में पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न
अयोध्या
अखिल भारतीय विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में माता भगवती देवी शर्मा जी के जन्म शताब्दी वर्ष तथा पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की महापुरश्चरण साधना एवं अखण्ड दीप प्राकट्य के उपलक्ष्य में अयोध्या के बालक राम कॉलोनी स्थित ऋषि टोला (राजन पांडे के हाता) में पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। यज्ञ स्थल पर भक्तिमय वातावरण छाया रहा और सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया।
बौद्धिक सत्र को संबोधित करते हुए जोन समन्वयक देशबंधु तिवारी ने साधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य साधना के स्थान पर केवल साधनों के पीछे भाग रहा है, जिसके कारण जीवन में असंतुलन उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने भस्मासुर का उदाहरण देते हुए कहा कि साधना के अभाव मेंशक्ति भी विनाश का कारण बन सकती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को साधना से जुड़ना आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि गायत्री परिवार का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के अंतःकरण का शुद्धिकरण कर समाज में सद्बुद्धि और जनकल्याण की भावना को स्थापित करना है। साधना के माध्यम से ही व्यक्ति अपनी त्रुटियों को दूर कर सकता है और एक संतुलित, सार्थक जीवन जी सकता है।
यह आयोजन लाडली वर्मा एवं राजन पांडे के संयोजन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में ममता त्रिपाठी, सरिता मिश्रा, माधुरी तिवारी, कुमुद सिंह, ममता निषाद, रसना श्रीवास्तव, रीना पांडे, छाया सिंह, पूनम चौरसिया, सीता सिंह, निशा जायसवाल, गीता, सारिका मिश्रा, मुकेश श्रीवास्तव, विजय शंकर पांडे, विनोद सिंह, परितोष मिश्रा सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई।
अधिवेशन के दौरान सामूहिक प्रार्थना कर विश्व शांति, सद्बुद्धि और जनकल्याण की कामना की गई। आयोजन के अंत में सभी अतिथियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया तथा भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया गया।
 यह पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को सशक्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी साबित हुआ।
 रिपोर्ट: सह संपादक डॉ. आलोक कुमार द्विवेदी
गुजरात प्रवासी न्यूज़, हरिद्वार

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