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पश्चिम रेलवे में पहली बार वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को मिला प्रतिष्ठित CII GreenCo GOLD रेटिंग सम्मान

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पश्चिम रेलवे में पहली बार वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को मिला प्रतिष्ठित CII GreenCo GOLD रेटिंग सम्मान

रिपोर्ट: गुजरात प्रवासी न्यूज़, अहमदाबाद ब्यूरो

अहमदाबाद। पश्चिम रेलवे के इतिहास में पहली बार अहमदाबाद मंडल के अंतर्गत आने वाले वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड ने पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और सतत विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करते हुए प्रतिष्ठित CII GreenCo GOLD Rating प्राप्त की है। यह सम्मान कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के ग्रीन बिजनेस सेंटर (GBC) द्वारा नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 18 जून 2026 को आयोजित 15वें GreenCo Summit 2026 के दौरान प्रदान किया गया। यह उपलब्धि न केवल वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड बल्कि पूरे पश्चिम रेलवे और भारतीय रेल के लिए गर्व का विषय है।

यह प्रतिष्ठित सम्मान वरिष्ठ मंडल मैकेनिकल इंजीनियर (वटवा) श्री अशोक कुमार ने प्राप्त किया। GreenCo GOLD Rating प्राप्त करने वाला वटवा शेड पश्चिम रेलवे का पहला इलेक्ट्रिक लोको शेड बन गया है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रेल केवल यात्री एवं माल परिवहन सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है।

डीआरएम ने जताया गर्व

अहमदाबाद मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री वेद प्रकाश ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को प्राप्त GreenCo GOLD Rating पूरे अहमदाबाद मंडल और पश्चिम रेलवे के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान अधिकारियों एवं कर्मचारियों की वर्षों की मेहनत, नवाचार, संसाधनों के कुशल उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि भारतीय रेल वर्ष 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है और वटवा शेड की यह उपलब्धि उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सफलता देशभर की अन्य रेलवे इकाइयों को भी हरित तकनीकों को अपनाने और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

क्या है GreenCo Rating?

GreenCo Rating भारत की पहली समग्र पर्यावरणीय मूल्यांकन प्रणाली है, जिसे CII-Green Business Centre द्वारा विकसित किया गया है। यह किसी संस्थान के पर्यावरणीय प्रदर्शन, संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास के प्रयासों का मूल्यांकन करती है।

इस मूल्यांकन के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण, हरित अवसंरचना, हरित आपूर्ति श्रृंखला, पर्यावरणीय नवाचार तथा पारिस्थितिकी संरक्षण जैसे विभिन्न मानकों को शामिल किया जाता है। GOLD Rating इस प्रणाली के सर्वोच्च सम्मानों में से एक मानी जाती है।

डीजल से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर ऐतिहासिक बदलाव

वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डीजल आधारित परिचालन को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। वर्ष 2022-23 में जहां 1.88 करोड़ लीटर से अधिक हाई स्पीड डीजल (HSD) की खपत होती थी, वहीं अब यह खपत पूरी तरह शून्य हो चुकी है।

इस बदलाव से Scope-1 ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 100 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इससे न केवल प्रदूषण कम हुआ है, बल्कि रेलवे की ऊर्जा लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

ऊर्जा दक्षता के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग

वटवा शेड में ऊर्जा संरक्षण के लिए कई अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाया गया है। कार्यशालाओं और असेंबली बे में प्राकृतिक प्रकाश के अधिकतम उपयोग हेतु लॉन्ग-ट्यूब डेलाइट हार्वेस्टिंग (Brillantor) प्रणाली स्थापित की गई है।

इसके अतिरिक्त पारंपरिक बिजली खपत करने वाले उपकरणों के स्थान पर 5-स्टार रेटेड BLDC पंखे लगाए गए हैं। CFL और हैलोजन लाइटों को हटाकर LED लाइटें स्थापित की गई हैं। ऊर्जा की बचत के लिए ऑक्यूपेंसी सेंसर और एस्ट्रोनॉमिकल टाइमर भी लगाए गए हैं, जिससे अनावश्यक बिजली खपत को रोका जा सके।

जल संरक्षण में भी मिसाल

वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड ने जल संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण प्रणाली के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 20.5 लाख लीटर जल पुनर्भरण की क्षमता विकसित की गई है।

लोकोमोटिव विंडशील्ड वॉशर सिस्टम में तकनीकी सुधार किए गए हैं, जिससे कम पानी में बेहतर सफाई संभव हो सकी है। साथ ही जलरहित यूरिनल की व्यवस्था कर हजारों लीटर पानी की बचत सुनिश्चित की गई है। अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण से ताजे पानी की खपत में भी लगातार कमी आई है।

सौर ऊर्जा उत्पादन में बढ़ाया योगदान

अहमदाबाद मंडल ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। मंडल में लगभग 1863 किलोवाट पीक क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनसे प्रतिवर्ष करीब 24.22 लाख यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन हो रहा है।

वटवा शेड के लिए अलग से रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की योजना भी तैयार की गई है। इससे रेलवे के कार्बन फुटप्रिंट को और कम करने में मदद मिलेगी।

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगातार कमी

वटवा शेड ने Scope-1, Scope-2 और Scope-3 श्रेणियों में कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता में लगातार वर्ष-दर-वर्ष कमी दर्ज की है। परिसर में 800 से अधिक वृक्षों का संरक्षण और हरित क्षेत्र का विस्तार भी कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पहलें भारतीय रेल को दुनिया की सबसे पर्यावरण-अनुकूल रेल प्रणालियों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ की दिशा में सफलता

वटवा शेड ने ‘Zero Waste to Landfill’ अवधारणा को अपनाकर अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। कचरे का स्रोत स्तर पर पृथक्करण, अधिकृत एजेंसियों द्वारा पुनर्चक्रण तथा पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था लागू की गई है।

शेड में ISO 14001 और ISO 50001 मानकों के अनुरूप पर्यावरण एवं ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली लागू है। पुर्जों के पुनः उपयोग, सामग्री संरक्षण और वार्षिक औसत खपत की नियमित समीक्षा के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 38 लाख रुपये की बचत की जा रही है।

नवाचारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड केवल पर्यावरणीय क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचारों में भी अग्रणी रहा है। शेड द्वारा विकसित एक तकनीकी संशोधन को रेलवे डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) ने स्वीकार कर पूरे भारतीय रेल नेटवर्क में अपनाया है।

इसके अलावा रेलवे बोर्ड द्वारा आयोजित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव केबिन अपग्रेडेशन प्रतियोगिता में भी वटवा शेड को संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। सुरक्षा, कार्यक्षमता और उत्पादकता बढ़ाने वाले कई नवाचार यहां विकसित किए गए हैं।

भारतीय रेल के हरित भविष्य की मजबूत नींव

विशेषज्ञों का मानना है कि वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को प्राप्त GreenCo GOLD Rating केवल एक सम्मान नहीं बल्कि भारतीय रेल के हरित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सफलता दिखाती है कि आधुनिक तकनीक, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और परिचालन उत्कृष्टता एक साथ चलते हुए सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकती हैं।

वटवा शेड के अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों से मिली यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में भारतीय रेल को वर्ष 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी और देशभर की रेलवे इकाइयों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

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