रिपोर्ट: राहुल शर्मा, गुजरात प्रवासी न्यूज़, मथुरा
मथुरा। आत्ममंथन भीतर की यात्रा है, जिसे केवल मन और बुद्धि के स्तर पर नहीं, बल्कि आत्मिक रूप में ही तय किया जा सकता है। इसी दिव्य संदेश के साथ हरियाणा के समालखा स्थित निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर शुक्रवार को 78वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का भव्य शुभारंभ हुआ। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने मानवता के नाम अपने पावन वचनों में कहा कि जब मनुष्य निरंकार परमात्मा से जुड़ता है, तभी वास्तविक आत्ममंथन संभव होता है।

इस चार दिवसीय समागम में न केवल भारतवर्ष के कोने-कोने से, बल्कि विश्वभर से लाखों श्रद्धालु भक्त शामिल हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश से लगभग एक लाख भक्त इस पावन अवसर का हिस्सा बने हैं।
मीडिया सहायक किशोर स्वर्ण के अनुसार, मथुरा जोन के जोनल इंचार्ज एच.के. अरोड़ा के नेतृत्व में ब्रज क्षेत्र से पहुंचे हजारों भक्त समागम स्थल पर सेवाएं दे रहे हैं। निरंकारी प्रदर्शनी, रेलवे काउंटर, प्रेस एवं पब्लिसिटी, प्रचार विभाग, ज्ञान कक्ष आदि में ब्रज भक्त सक्रियता से योगदान दे रहे हैं।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने संदेश में कहा— “हर मानव के अंदर और बाहर एक शाश्वत सत्य निवास करता है। जब मनुष्य इस सत्य को पहचान लेता है, तो उसके भीतर प्रेम और एकता का भाव स्वतः जागृत होता है। अज्ञानता ही नफरत को जन्म देती है, जबकि सच्चा ज्ञान प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देता है।”

उन्होंने समस्त मानवता के कल्याण की शुभकामना व्यक्त करते हुए कहा कि “प्रत्येक मनुष्य स्वयं के सुधार से शुरुआत करे, क्योंकि जब व्यक्ति सुधरेगा, तब समाज सुधरेगा और फिर संसार में अमन और भाईचारे का वातावरण स्थापित होगा।”
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं आदरणीय निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन छत्रछाया में आयोजित इस समागम के शुभारंभ पर दिव्य युगल को फूलों से सुसज्जित खुली पालकी में विराजमान कर भव्य शोभायात्रा के रूप में मुख्य मंच तक लाया गया।
यहां उनका स्वागत निरंकारी इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूज़िक एंड आर्ट्स (NIMA) के 2500 से अधिक छात्रों द्वारा भरतनाट्यम और स्वागती गीत से किया गया।
श्रद्धालुओं की आंखों में आनंद की अश्रुधारा और वातावरण में भक्ति की सुगंध व्याप्त थी। समागम स्थल पर उपस्थित भक्त जाति, धर्म, भाषा की सीमाओं को भुलाकर केवल प्रेम और मानवता की भावना में सराबोर दिखाई दिए।







